Skip to main content

नींद ना आने की बीमारी से लेकर पेट फूलने की समस्या दूर करता है बैंगन

सब्जियों का राजा कहे जाने वाले बैंगन के औषधीय गुण भी हो सकते हैं, इस बात को बहुत कम लोग जानते होंगे। हिन्दुस्तान की लगभग हर रसोई में बैंगन को सब्जी के तौर पर पकाया जाता है, लेकिन सुदूर आदिवासी अंचलों में इसे अनेक हर्बल नुस्खों के तौर पर अपनाया जाता है। चलिए जानते हैं बैंगन से जुड़े कुछ हर्बल नुस्खों के बारे में..
1 of 3
1- अगर आपको नींद नहीं आती !
आग पर भुने हुए बैंगन में स्वादानुसार शहद डालकर रात में खाने से नींद अच्छी तरह से आती है। आदिवासियों के अनुसार बैंगन नींद ना आने की बीमारी को दूर करने में काफी कारगर सिद्ध होता है।
2- पेट फूलने और बदहज़मी की समस्या है!
डांग- गुजरात के हर्बल जानकारों के अनुसार बैंगन का सूप तैयार किया जाए जिसमें हींग और लहसुन भी स्वाद के अनुसार मिलाया जाए और सेवन किया जाए, तो यह पेट फूलना, गैस, बदहज़मी और अपचन जैसी समस्याओं में काफी राहत देता है।
आगे स्लाइड्स पर क्लिक कीजिए और बैंगन के बाकी औषधीय गुण जानिए।

नोट- बैंगन के संदर्भ में रोचक जानकारियों और परंपरागत हर्बल ज्ञान का जिक्र कर रहें हैं डॉ. दीपक आचार्य (डायरेक्टर-अभुमका हर्बल प्रा. लि. अहमदाबाद)। डॉ. आचार्य पिछले 15 सालों से ज़्यादा समय से भारत के सुदूर आदिवासी अंचलों जैसे पातालकोट (मध्यप्रदेश), डांग (गुजरात) और अरावली (राजस्थान) से आदिवासियों के पारंपरिक ज्ञान को एकत्रित कर उन्हें आधुनिक विज्ञान की मदद से प्रमाणित करने का कार्य कर रहे हैं।

3- खांसी की समस्या दूर होती है
2 of 3
पातालकोट में आदिवासी बैंगन को चूल्हे पर भून लेते हैं और इसमें स्वादानुसार नमक छिड़ककर खाते हैं। इन आदिवासियों के अनुसार बैंगन को इस तरह चबाना खांसी ठीक कर देता है और कफ बाहर निकल आता है।
4- रक्त की कमी दूर करता है
आदिवासी चूल्हे पर भुने हुए बैंगन में थोडी सी शक्कर डालकर सुबह खाली पेट खाने की सलाह देते हैं। उनका मानना है कि ऐसा करने से शरीर में रक्त की कमी दूर हो जाती है। वैसे अक्सर आदिवासी हर्बल जानकार इस फार्मूले को मलेरिया रोग के इलाज के बाद देते हैं।
5- मशरूम का ज़हरीला असर खत्म करता है

अगर किसी वजह से ज़हरीले मशरूम का सेवन कर लिया जाए, तो व्यक्ति को तुरंत भुने हुए बैंगन को मसलकर खिलाना चाहिए। इससे मशरूम का ज़हरीला असर खत्म हो जाता है।



6- डायबिटीज़ के लिए महत्वपूर्ण
3 of 3
बैंगन में फायबर की प्रचूर मात्रा पाई जाती है और इसमें पाए जाने वाले कार्बोहाईड्रेट अल्प मात्रा में घुलनशील प्रकृति के होते हैं, इसलिए इसे डायबिटीज़ के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। टाईप 2 डायबिटीज़ से ग्रस्त रोगियों को नित्य बैंगन सेवन से शर्करा नियंत्रण में काफी मदद मिलती है।
7- हृदयरोगियों के लिए उत्तम
आदिवासियों के अनुसार बैंगन का सेवन उच्च रक्तचाप और हृदयरोगियों के लिए उत्तम है। आधुनिक विज्ञान भी इस बात की पैरवी करता है। अक्सर देखा गया है कि शरीर में लौह तत्वों की अधिकता नुकसान करती है और ऐसे में नासुनिन नामक रसायन जो बैंगन में पाया जाता है, यह शरीर के लौह तत्वों की अधिकता को नियंत्रित करता है और इसे सामान्य बनाने में मदद करता है। इस वजह से हॄदय संचालन सामान्य रहता है और उच्च रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है।

Comments

Popular posts from this blog

बड़ी आंखों वाली लड़की होती है भाग्यवान, ये हैं किस्मत वाली स्त्रियों के चिह्न

सभी पुरुष चाहते हैं कि उनका विवाह ऐसी स्त्री से हो जो भाग्यशाली हो व कुल का नाम ऊंचा करने वाली हो, लेकिन सामान्य रूप से किसी स्त्री को देखकर इस बारे में विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि सुंदर दिखने वाली स्त्री कुटिल भी हो सकती है, वहीं साधारण सी दिखने वाली स्त्री विचारवान हो सकती है। ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसी विधा भी है जिसके अनुसार किसी भी स्त्री के अंगों पर विचारकर उसके स्वभाव व चरित्र के बारे में काफी कुछ आसानी से जाना सकता है।  इस विधा को सामुद्रिक रहस्य कहते हैं। इस विधा का संपूर्ण वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखकर  सौभाग्यशाली स्त्रियों के विषय में आसानी से विचार किया जा सकता है-    1 of 8 Next श्लोक पूर्णचंद्रमुखी या च बालसूर्य-समप्रभा। विशालनेत्रा विम्बोष्ठी सा कन्या लभते सुखम् ।1। या च कांचनवर्णाभ रक्तपुष्परोरुहा। सहस्त्राणां तु नारीणां भवेत् सापि पतिव्रता ।2।  ...

वोटर भेड़ ही बने रहे तो ऊन के साथ चमड़ी भी उधेड़ लेंगे राजनीतिक दल

राजस्थान चुनाव की दस्तक के साथ हवा में उछल रहे नारों-जुमलों ने एक बार फिर मधु लिमये की बात याद दिला दी- 'जनता उस भेड़ की तरह है जिसकी चमड़ी पर से हम राजनीतिक दल वोटों की ऊन काटते हैं। ऊन काटे तब तक तो ठीक, लेकिन कुछ दल चमड़ी तक काट लेते हैं।' यहां भी राजनीतिक कुचक्र से बचाने की भावना भले ही हो, लेकिन मतदाता को भेड़ कहा गया। छह दशक की चुनावी यात्रा में यह साफ हो गया है कि राजनीतिक दल वोटर को क्या मानते हैं। जीत की जुगत के लिए हर बार बुनते हैं जुमले-नारे। गरीबी हटाओ, सिंहासन खाली करो, शाइनिंग इंडिया, बच्चा-बच्चा राम का.. जैसे नारे और उनका हश्र प्रमाण है कि राजनीतिक विचारधाराएं मृतप्राय: हो चुकी हैं। चुनावी सभाओं में साम्यवाद, समाजवाद, धार्मिक सहिष्णुता जैसे मुद्दों पर होने वाली बातें इतिहास बन गई है। उनकी जगह अब है- छद्म राष्ट्रवाद, धर्म-संप्रदाय, समुदाय में ध्रुवीकरण के जरिये पैठ बनाने के प्रयास। जो दल जिस शिद्दत से इन भावनाओं को भुना सका, धन-बाहुबल का बेहतर मिश्रण कर सका, वह सदन के हां-पक्ष में पहुंचा। बात जब राजस्थान विधानसभा की हैं तो हालात एकांतरा बुखार जैसी है। ऐसा बु...

अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर में अलग समुदाय का निर्माण; आखिर एक ही देश में इतनी संवैधानिक विषमता क्यों?

संविधान के कुछ जानकार कश्मीर के अलगाववाद के लिए अनुच्छेद 370 से अधिक अनुच्छेद 35ए को जिम्मेदार मानते हैं। अनुच्छेद 35ए संविधान का एक अदृश्य और रहस्यमय भाग है। यह संविधान के मूल पाठ में शामिल नहीं है। इसे परिशिष्ट के रूप में जोड़ा गया है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर राज्य की शासन योजना का आधार स्तंभ है। संविधान का मूल उद्देश्य देश को एकजुट करना होता है, किंतु इसकी भूमिका इसके उलट है। यह जम्मू-कश्मीर में एक अलग समुदाय का निर्माण करता है जिन्हें स्थाई नागरिक कहा जाता है और केवल उन्हें ही राज्य सरकार को चुनने से लेकर संपत्ति खरीदने का अधिकार हासिल है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि संविधान के इतने महत्वपूर्ण संशोधन में संसद की कोई भूमिका नहीं थी। न तो उसे सदन के पटल पर रखा गया और न ही उस पर बहस या मतदान हुआ। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 35ए में उल्लिखित विषयों पर बनाए गए कानून भारत के संविधान के अनुरूप होने जरूरी नहीं हैं। उनका उल्लंघन भी हो सकता है और अंतर्विरोध होने पर भारत के संविधान की जगह इन कानूनों को मान्यता दी जाएगी। इस अधिकार के तहत विधानसभा को जम्मू-कश्मीर के स्थाई नागरिकों की परिभाषा त...