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यह इंडिया है मेरे यार!

1) हम बेटियों की पढ़ाई से ज्यादा उनकी शादी पर खर्च करते हैं। 2) हम एक ऐसे देश में रहते हैं जहां पुलिस वालों को देखकर हम सुरक्षित महसूस कर ने की बजाय घबरा जाते हैं। 3) IAS एग्जाम में एक शख्स 'दहेज : एक सामाजिक बुराई' विषय पर 1500 शब्दों का बेहतरीन लेख लिखता है। सबको प्रभावित करता है और एग्ज़ाम पास कर लेता है। एक साल बाद यही शख्स दहेज में 1 करोड़ रुपये मांगता है क्योंकि वह एक IAS अफसर है। 4) भारतीय बहुत शर्मीले होते हैं लेकिन फिर भी 121 करोड़ हैं। 5) भारतीयों को स्क्रैचप्रूफ गर्रिला ग्लास वाले स्मार्टफोन पर स्क्रीन गार्ड लगवाना जरूरी लगता है लेकिन बाइक चलाते समय हेल्मेट लगाना नहीं। 6) भारतीय समाज 'रेप मत करो' की बजाय 'रेप से बचो' सिखाता है। 7) यहां योग्य लोगों की बजाय आरक्षण प्राप्त लोग ज्यादा फायदे में रहते हैं। 8) सबसे बेकार फिल्में सबसे ज्यादा कमाई करती हैं। 9) यहां का समाज, एक पॉर्न स्टार को तो सिलेब्रिटी के रूप में खास दर्जा दे देता है लेकिन एक रेप पीड़िता को आम इंसान का दर्जा भी नहीं देता। 10) नेता हमें तोड़ते हैं जबकि आतंकवादी हमें जोड़...
अगर धोनी इतना बड़ा कप्तान होता तो क्यों हार गई टीम। पहली बात तो ये की टीम एक व्यक्ति विशेष द्वारा चुनी गई थी और उस व्यक्ति विशेष ने 30 मैं से 16 खिलाडी एक ही जाती(caste)के भर दिए। क्या पूरे भारत मैं कोई और caste क्रिकेट नही खेलती।। अगली बात एक ऐसे टटपूंजीए खिलाड़ी को एक महान खिलाड़ी की जगह खिलाया गया जो खेल से ज्यादा अपनी दाड़ी मूछों के कारण चर्चित होना चाहता था। धोनी को अपने खेल से ज्यादा अपनी कप्तानी और टीम का घमंड था और किस्मत का साथ।। टी20 और पिछला वर्ल्डकप जिन खिलाडियों के ब ूते जीत गया वो फिट होते हुए भी टीम से बहार थे जबकि एक जाती विशेष के अनफिट खिलाडियों को फाइनल 15 मैं लिया गया। और कुछ किस्मत के धनि खिलाडी या तो पेप्सी बेचते दिख रहे थे या फिर टायर की ऐड करते। जैसे की BCCI वाले इन्हें पैसे ही नही देते।। और रन बनाने से ज्यादा धयान "माय लव" के ट्वीट पर था।। सबसे बड़े मैच मैं सबसे फिस्सडी, अगर कप्तान और मैनेजमेंट टीम चुनते समय किसी अपने का पक्ष ना ले कर देश के लिए टीम चुनते तो 11 मैं से 3 ऐसे खिलाडी थे जिनका कायदे से रणजी ट्राफी मैं भी नंबर न पड़े।। कुछ भगत लोग टी20 और 2011 क...

फ्लिपकार्ट-स्नैपडील में निकली हैं नौकरी, मिलेगी अच्छी सैलरी, करें अप्लाई

नई दिल्‍ली.  देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने 2015 में कुल 20 लाख नौकरियां देना का दावा किया है। यह नौकरियां मुख्यत: मार्केट प्लेस और एन्‍सीलियरी सर्विसेज के क्षेत्र में दी जाएंगी। बेंगलुरु की इस कंपनी ने कहा है कि कुल 20 लाख में से 60 फीसदी नौकरियां लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग सेक्‍टर में दी जाएंगी। फ्लिपकार्ट के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (मार्केटप्‍लेस) अंकित नागोरी के मुताबिक, हमारे पोर्टल पर विक्रेता प्रत्‍यक्ष तौर पर अपने-अपने क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के लिए जिम्‍मेदार होंगे। किस सेक्टर में है नौकरी ई-कॉमर्स सपोर्ट सुविधा जैसे मर्चेंडाइजिंग, खरीदी, पैकेजिंग और कैटालॉगिंग में पिछले एक साल में 75,000 से ज्‍यादा लोगों को रोजगार दिए गए हैं। उन्‍होंने आगे कहा कि पुराने ट्रेंड को देखते हुए फ्लिपकार्ट को पूरा भरोसा है कि वह इस साल 20 लाख लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराएगी। बता दें कि भारत में ई-कॉमर्स सेक्‍टर का तेजी से विकास होने से सभी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। पिछले साल ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री में तकरीबन 5 लाख लोगों को रोजगार हासिल हुआ है। स्...

भूमि अधिग्रहण बिल

जो लोग भूमि अधिग्रहण बिल का समर्थन कर रहे हैं, वे वही लोग हैं जो कि अपने फायदे के लिए अपनी माँ-बहन-बेटी और पत्नी तक का इस्तेमाल करने से नहीं चूकते. क्युंकि गीता में भगवन श्री कृष्ण ने कहा है कि - जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी। । कहने का अर्थ है भूमि उस किसान की माँ है और माँ का मोल नहीं लगाया जाता। पर ये अंधभक्त तो शायद दिमाग का इस्तेमाल करते ही नहीं और या फिर दिमाग है ही नहीं। . एक बात शायद भूल रहे हो आप लोग यदि जमीन नहीं रहेगी तो खाओगे क्या ? जब जमीन नहीं रहेगी तो अन्नदाता (किसान) नहीं रहेगा तो क्या आप लोग मोटर कार, टायर, कपडे या पैसा खाओगे?? सोचो। उस किसान के बारे में सोचो जिसकी कोई औकात नहीं रहेगी इस बिल के पास होने के बाद। कोई भी ऐरा gaira कोई भी प्रोजेक्ट फाइल दिखा कर जमीन ले जायेगा चाहे उसका कोई भी उसे न करे ये कहाँ का न्याय है भाई कि जो कर रहा है उससे छीन कर न करने वाले को दे दो। पर लगता है तुम लोगो कि तो बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है तुम्हे तो सपने देखने का शौक है , लोक सभा चुनाव में मोदी जी ने सपने दिखाए, दिल्ली विधान सभा में केजरीवाल ने सपने दिखाए। । यही मोदी जी मुफ़्ती के ह...

गाँधी खानदान कि असलियत « धर्मो रक्षति रक्षितः - आइए आज गाँधी की कुछ असलियत जानते है,

जो हमे हमारी स्कूली किताबो मे पढ़ने को नही मिला.गाँधी – वो शख्स, जो कहता था कि उसके मन मे कभी बलात्कार करने की भावना नही आती.हाँ, ये सच है कि वो बलात्कार नही कर सकते थे. लेकिन इस चीज को वो साबित करने के लिए अपने साथ किसी गरीब घरकी लड़की को नंगा करके उसके साथ नंगा सोते थे. क्या ये सही था? आजादी के बाद अखंड भारत को तीन हिस्सो मे तोड़ने की स्वीकृति इसी गाँधी ने दी थी.क्या ये सही था? सरदार पटेल की ज गह नेहरू को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भी गाँधी ने ही कहा था.क्या ये सही निर्णय था? ये वही गाँधी था जिसने सुभाष चंद्र बोस का कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दिलवाया था.क्या ये सही था? जब नेहरू की बेटी इंदिरा एक मुस्लिम के साथ शादी कर चुकी थी और नेहरू ने उसे अपने घर से, अपने नाम से,अपनी हर चीज से बेदखल कर दिया था, तब इसी गाँधी ने इंदिरा और फिरोज को अपना SURNAME देकर गाँधी बनाया ताकि गाँधी के नाम पर ये इस देश को अंग्रेजो की तरह लूटते रहे.क्या ये सही फैसला था? जब सरदार भगतसिंह को फाँसी होने वाली थी तो गाँधी और नेहरू ही वो शख्स थे जो इस फाँसी को रुकवा सकते थे.लेकिन वो गाँधी ही था जिसने भगतसिंह की फा...

स्वाइन फ्लू से बचना है तो यह मेसेज जरूर पढ़ें:

इस समय स्वाइन फ्लू जैसे फ्लू की वजह से लोगो में भय बना हुआ है । इससे बचाव हेतु कपूर और इलायची के चूर्ण को कपडे में बाँध कर सूंघने का उपाय भी बताया गया है । पुराने समय में वातावरण को शुद्ध करने के लिए हमारे ऋषि मुनि हवन किया करते थे । हवन में डाली जाने वाली सामग्री में औषधिय गुण होते है । 5 मार्च को होली है । होलिका दहन को हम लोग हवन की तरह उपयोग कर सकते है । होलिका दहन में कपूर की 2-3 टिकिया जरूर से डाले । एक परिवार से 2-3 टिकिया, एक जगह की होली में लगभग 20 परिवार होली में डालें इसी प्रकार हर स्थान पर जलने वाली होली में किया जाये । होलिका दहन सभी स्थानों पर एक ही मुहूर्त में होता है , जब एक साथ इतने स्थानों पर इस प्रकार की धुआं उठेगी तो वातावरण में से कीटाणुओं का नाश होगा और वातावरण शुद्ध होगा । इस बात को सरलता से समझने के लिए हम एक फ़िल्मी दृश्य का उदाहरण लेते है :- फिल्म कृष 3 में एक शहर एक खतरनाक वायरस से संक्रमित हो जाता है , लोगो को वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए जल्द से जल्द एंटी डोस देना जरूरी होता है , कम समय में पूरे शहर के लोगो को एंटी डोज़ संभव नहीं होने पर उस दवा यानि एंटी...
ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और ट्रैवल में लगने वाला समय घटाने के मकसद से सुरेश प्रभु की अगुवाई वाला रेल मंत्रालय जल्द ही बुलेट ट्रेनों की तर्ज पर बिना इंजन के खुद चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत करेगा। इससे मेट्रो शहरों के बीच ट्रैवल का समय 20 पर्सेंट कम किया जा सकेगा और हवाई जहाज से सफर करने वाले बहुत से लोग भी ट्रेनों की सवारी करना पसंद करेंगे। इस प्रोजेक्ट की लागत 100 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसके लिए अगले दो वर्षों में देश में इम्पोर्टेड ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। प्रभु ने  गुरुवार को अपना पहला रेल बजट पेश करने के दौरान बताया, 'यात्रा का बेहतर अनुभव देने और ट्रैवल टाइम में लगभग 20 पर्सेंट की कटौती करने के मकसद से ट्रेन सेट्स के नाम से एक मॉडर्न ट्रेन सिस्टम शुरू करने का प्रपोजल है। ये डिजाइन में बुलेट ट्रेनों जैसी होंगी और बिना इंजन के मौजूदा ट्रैक्स पर चल सकेंगी।' उन्होंने कहा कि इससे रेलवे की कपैसिटी बढ़ेगी, एनर्जी की बचत होगी और आउटपुट में इजाफा किया जा सकेगा। प्रभु के मुताबिक, 'हमें इन ट्रेनों के पहले सेट के हमारे सिस्टम पर अगले दो वर्षों के अंदर चल...