Skip to main content

फ्लिपकार्ट-स्नैपडील में निकली हैं नौकरी, मिलेगी अच्छी सैलरी, करें अप्लाई

नई दिल्‍ली. देश की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट ने 2015 में कुल 20 लाख नौकरियां देना का दावा किया है। यह नौकरियां मुख्यत: मार्केट प्लेस और एन्‍सीलियरी सर्विसेज के क्षेत्र में दी जाएंगी। बेंगलुरु की इस कंपनी ने कहा है कि कुल 20 लाख में से 60 फीसदी नौकरियां लॉजिस्टिक और वेयरहाउसिंग सेक्‍टर में दी जाएंगी। फ्लिपकार्ट के सीनियर वाइस प्रेसीडेंट (मार्केटप्‍लेस) अंकित नागोरी के मुताबिक, हमारे पोर्टल पर विक्रेता प्रत्‍यक्ष तौर पर अपने-अपने क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने के लिए जिम्‍मेदार होंगे।
किस सेक्टर में है नौकरी
ई-कॉमर्स सपोर्ट सुविधा जैसे मर्चेंडाइजिंग, खरीदी, पैकेजिंग और कैटालॉगिंग में पिछले एक साल में 75,000 से ज्‍यादा लोगों को रोजगार दिए गए हैं। उन्‍होंने आगे कहा कि पुराने ट्रेंड को देखते हुए फ्लिपकार्ट को पूरा भरोसा है कि वह इस साल 20 लाख लोगों को रोजगार उपलब्‍ध कराएगी। बता दें कि भारत में ई-कॉमर्स सेक्‍टर का तेजी से विकास होने से सभी क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। पिछले साल ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री में तकरीबन 5 लाख लोगों को रोजगार हासिल हुआ है।
स्नैपडील में भी है नौकरी
ई-कॉमर्स कंपनी स्‍नैपडील साल 2015 में कर्मचारि‍यों की संख्‍या को दोगुना कर सकती है। वर्तमान में, कंपनी के पास 5,000 कर्मचारी हैं। कंपनि‍यां टेक्‍नोलॉजी, सेल्‍स और मार्केटिंग से जुड़े लोगों को नि‍युक्‍त करेंगी। कंपनी अपने क्षेत्रीय केंद्रों के लि‍ए भौगोलि‍क जानकारी रखने वाले लोगों को नि‍युक्‍त करेगी। कंपनी का मकसद लोकल सेर्ल्‍स के ज्‍यादा से ज्‍यादा नजदीक पहुंचने की है। कंपनी के मुताबि‍क, प्रत्‍येक सेंटर के पास एमएंडए होने के साथ-साथ अकाउंटिंग टीम होगी। वहीं, दोनों ग्रुप में करीब 500 कर्मचारि‍यों की भर्ती होगी। कंपनी ने बताया कि‍ हम केंद्र और संवाद के मॉडल पर काम करेंगे और ये कर्मचारी घरेलू बाजार के दुकानदारों के पास जाएंगे।
अमेजन भी देगी मौका
अमेजन भी इस साल कर्मचारि‍यों में 30 से 35 फीसदी का इजाफा कर सकती है। प्रवक्‍ता के मुताबि‍क, बि‍जनेस और ई-कॉमर्स इंडस्‍ट्री की तेजी को देखते हुए हम बड़े पैमाने पर नि‍युक्‍ति‍यां भी करेंगे। हमारा मुख्‍य फोकस टेक्‍नोलॉजी पर है। आईटी सेक्‍टर के संगठन नैस्‍कॉम के मुताबि‍क, भारत में ई-कॉमर्स सेक्‍टर साल 2010 के बाद से सालाना 25 फीसदी की ग्रोथ के साथ बढ़ रहा है। फि‍लहाल यह इंडस्‍ट्री 14 अरब डॉलर की है।
फैब फर्नि‍चिंग डॉट कॉम भी करेंगी नि‍युक्‍ति
ऐसा नहीं है कि‍ यह नि‍युक्‍ति‍यां केवल बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी ही कर रही हैं। ई-प्‍लेटफॉर्म पर मौजूद कई छोटी कंपनि‍यां भी अपनी टीम का वि‍स्‍तार करने की योजना बना रही हैं। फैब फर्नि‍चिंग डॉट कॉम 2015 के अंत तक अपने कर्मचारि‍यों की संख्‍या को 1,000 से बढ़ाकर 4,000 करने की योजना बना रही है।
अर्बनलैडर.कॉम भी निकालेगी नौकरी
इसी तरह, अर्बनलैडर डॉट कॉम भी साल 2015 में अपने इंप्‍लॉई बेस को 600 से बढ़ाकर 1,400 करेगी। साथ ही, पेपरफ्राई 500 और कर्मचारि‍यों की भर्ती कर सकती है। ऑनलाइन ज्‍वैलरी रि‍टेलर ब्‍लयूस्‍टोन भी कर्मचारि‍यों की संख्‍या को 250 से बढ़ाकर 600 करने की योजना बना रही है।
टीयर-2 इंजीनि‍यरिंग और मैनेजमेंट से भी होगी भर्ति‍यां
सीनि‍यर लेवल पर इंडि‍यन इंस्‍टीट्यूट ऑफ टेक्‍नोलॉजी (आईआईटी) और इंडि‍यन इंस्‍टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम) से ही भर्ति‍यां होंगी। वहीं, ज्‍यादातर ई-कॉमर्स कंपनि‍यां टीयर-2 इंजीनि‍यरिंग और मैनेजमेंट इंस्‍टीट्यूट से लोगों को नि‍युक्‍त करेंगी। कई कंपनि‍यों के मानव संसाधन प्रमुखों के मुताबि‍क, टीयर-1 कॉलेज से ‘पेचीदा और चुनौति‍पूर्ण पदकों’ पर नि‍युक्‍ति‍यां होती हैं।
ई-कॉमर्स कंपनि‍यों की योजना
कंपनि‍यां
अनुमानि‍त भर्ति‍यां (2015 में)
स्‍नैपडील
5,000
अर्बनलैडर
1,400
फ्लि‍पकार्ट
1,000 (टेक्‍नोलॉजी टीम में)
फैबफर्नि‍शिंग
1,000
कारदेखो डॉट कॉम
800
फैशन एंड यू
750
ब्‍लूयस्‍टोन
600
इंडि‍या प्रॉपर्टी
500
पि‍क एन गेट
500
पेपरफ्राई
500
शॉपक्‍लि‍क
300
जि‍वामे
200
अरविंद इंटरनेट
200
लाइमरोड
150

Comments

Popular posts from this blog

बड़ी आंखों वाली लड़की होती है भाग्यवान, ये हैं किस्मत वाली स्त्रियों के चिह्न

सभी पुरुष चाहते हैं कि उनका विवाह ऐसी स्त्री से हो जो भाग्यशाली हो व कुल का नाम ऊंचा करने वाली हो, लेकिन सामान्य रूप से किसी स्त्री को देखकर इस बारे में विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि सुंदर दिखने वाली स्त्री कुटिल भी हो सकती है, वहीं साधारण सी दिखने वाली स्त्री विचारवान हो सकती है। ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसी विधा भी है जिसके अनुसार किसी भी स्त्री के अंगों पर विचारकर उसके स्वभाव व चरित्र के बारे में काफी कुछ आसानी से जाना सकता है।  इस विधा को सामुद्रिक रहस्य कहते हैं। इस विधा का संपूर्ण वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखकर  सौभाग्यशाली स्त्रियों के विषय में आसानी से विचार किया जा सकता है-    1 of 8 Next श्लोक पूर्णचंद्रमुखी या च बालसूर्य-समप्रभा। विशालनेत्रा विम्बोष्ठी सा कन्या लभते सुखम् ।1। या च कांचनवर्णाभ रक्तपुष्परोरुहा। सहस्त्राणां तु नारीणां भवेत् सापि पतिव्रता ।2।  ...

वोटर भेड़ ही बने रहे तो ऊन के साथ चमड़ी भी उधेड़ लेंगे राजनीतिक दल

राजस्थान चुनाव की दस्तक के साथ हवा में उछल रहे नारों-जुमलों ने एक बार फिर मधु लिमये की बात याद दिला दी- 'जनता उस भेड़ की तरह है जिसकी चमड़ी पर से हम राजनीतिक दल वोटों की ऊन काटते हैं। ऊन काटे तब तक तो ठीक, लेकिन कुछ दल चमड़ी तक काट लेते हैं।' यहां भी राजनीतिक कुचक्र से बचाने की भावना भले ही हो, लेकिन मतदाता को भेड़ कहा गया। छह दशक की चुनावी यात्रा में यह साफ हो गया है कि राजनीतिक दल वोटर को क्या मानते हैं। जीत की जुगत के लिए हर बार बुनते हैं जुमले-नारे। गरीबी हटाओ, सिंहासन खाली करो, शाइनिंग इंडिया, बच्चा-बच्चा राम का.. जैसे नारे और उनका हश्र प्रमाण है कि राजनीतिक विचारधाराएं मृतप्राय: हो चुकी हैं। चुनावी सभाओं में साम्यवाद, समाजवाद, धार्मिक सहिष्णुता जैसे मुद्दों पर होने वाली बातें इतिहास बन गई है। उनकी जगह अब है- छद्म राष्ट्रवाद, धर्म-संप्रदाय, समुदाय में ध्रुवीकरण के जरिये पैठ बनाने के प्रयास। जो दल जिस शिद्दत से इन भावनाओं को भुना सका, धन-बाहुबल का बेहतर मिश्रण कर सका, वह सदन के हां-पक्ष में पहुंचा। बात जब राजस्थान विधानसभा की हैं तो हालात एकांतरा बुखार जैसी है। ऐसा बु...

अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर में अलग समुदाय का निर्माण; आखिर एक ही देश में इतनी संवैधानिक विषमता क्यों?

संविधान के कुछ जानकार कश्मीर के अलगाववाद के लिए अनुच्छेद 370 से अधिक अनुच्छेद 35ए को जिम्मेदार मानते हैं। अनुच्छेद 35ए संविधान का एक अदृश्य और रहस्यमय भाग है। यह संविधान के मूल पाठ में शामिल नहीं है। इसे परिशिष्ट के रूप में जोड़ा गया है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर राज्य की शासन योजना का आधार स्तंभ है। संविधान का मूल उद्देश्य देश को एकजुट करना होता है, किंतु इसकी भूमिका इसके उलट है। यह जम्मू-कश्मीर में एक अलग समुदाय का निर्माण करता है जिन्हें स्थाई नागरिक कहा जाता है और केवल उन्हें ही राज्य सरकार को चुनने से लेकर संपत्ति खरीदने का अधिकार हासिल है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि संविधान के इतने महत्वपूर्ण संशोधन में संसद की कोई भूमिका नहीं थी। न तो उसे सदन के पटल पर रखा गया और न ही उस पर बहस या मतदान हुआ। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 35ए में उल्लिखित विषयों पर बनाए गए कानून भारत के संविधान के अनुरूप होने जरूरी नहीं हैं। उनका उल्लंघन भी हो सकता है और अंतर्विरोध होने पर भारत के संविधान की जगह इन कानूनों को मान्यता दी जाएगी। इस अधिकार के तहत विधानसभा को जम्मू-कश्मीर के स्थाई नागरिकों की परिभाषा त...