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ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने और ट्रैवल में लगने वाला समय घटाने के मकसद से सुरेश प्रभु की अगुवाई वाला रेल मंत्रालय जल्द ही बुलेट ट्रेनों की तर्ज पर बिना इंजन के खुद चलने वाली ट्रेनों की शुरुआत करेगा। इससे मेट्रो शहरों के बीच ट्रैवल का समय 20 पर्सेंट कम किया जा सकेगा और हवाई जहाज से सफर करने वाले बहुत से लोग भी ट्रेनों की सवारी करना पसंद करेंगे।
इस प्रोजेक्ट की लागत 100 करोड़ रुपये होने की उम्मीद है। इसके लिए अगले दो वर्षों में देश में इम्पोर्टेड ट्रेनें चलाई जा सकती हैं। प्रभु ने गुरुवार को अपना पहला रेल बजट पेश करने के दौरान बताया, 'यात्रा का बेहतर अनुभव देने और ट्रैवल टाइम में लगभग 20 पर्सेंट की कटौती करने के मकसद से ट्रेन सेट्स के नाम से एक मॉडर्न ट्रेन सिस्टम शुरू करने का प्रपोजल है। ये डिजाइन में बुलेट ट्रेनों जैसी होंगी और बिना इंजन के मौजूदा ट्रैक्स पर चल सकेंगी।'
उन्होंने कहा कि इससे रेलवे की कपैसिटी बढ़ेगी, एनर्जी की बचत होगी और आउटपुट में इजाफा किया जा सकेगा। प्रभु के मुताबिक, 'हमें इन ट्रेनों के पहले सेट के हमारे सिस्टम पर अगले दो वर्षों के अंदर चलने की उम्मीद है। अनुभव के आधार पर इन ट्रेन सेट्स की भारत में मैन्युफैक्चरिंग पर विचार किया जाएगा।'
रेलवे मिनिस्ट्री के अधिकारियों ने इकॉनमिक टाइम्स को बताया कि एक ट्रेन सेट में आठ कोच होंगे, जिन्हें 100 करोड़ रुपये की कीमत पर आयात किया जाएगा। ये मौजूदा इन्फ्रास्ट्रक्चर पर चलेंगे। फीडबैक वेंचर्स के विनायक चटर्जी ने कहा, 'ट्रेन सेट्स ईएमयू (इलेक्ट्रिकल मल्टीपल यूनिट्स) का बेहतर वर्जन हैं।'
उनका कहना था कि ये ट्रेनें राजधानी और शताब्दी की जगह ले सकती हैं। भारतीय रेलवे ने नौ रेलवे कॉरिडोर की स्पीड मौजूदा 110 और 130 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 160 और 200 किलोमीटर प्रति घंटा करने का प्रपोजल दिया है जिससे दिल्ली-कोलकाता और दिल्ली-मुंबई रूट्स पर यात्रा एक रात में पूरी की जा सकेगी। इसके लिए ट्रैक को अपग्रेड करना होगा, जिसमें रोलिंग स्टॉक में सुधार करना और ट्रैक रिकॉर्डिंग, मॉनिटरिंग और मेंटेनेंस के लिए बेहतर तरीके अपनाना शामिल होगा। इसके साथ ही ट्रेन सेट्स की भी शुरुआत की जाएगी।
सीआईआई की रेल कमिटी के को-चेयरमैन तिलक राज सेठ ने कहा, 'मेट्रो शहरों के बीच यात्रा का समय कम करने की योजना केवल बिना लोकोमोटिव के खुद चलने वाले कोचों से ही संभव है। इसके शुरू होने पर एयर ट्रैवलर्स को भी खींचने में मदद मिलेगी।' मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल या बुलेट ट्रेन के बारे में प्रभु ने कहा, 'इसके लिए फिजिबिलिटी स्टडी अंतिम दौर में है और इसके इस वर्ष के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। रिपोर्ट आने के बाद इस पर तुरंत काम किया जाएगा।'
बुलेट ट्रेन का छोटा वर्जन
बुलेट ट्रेनें भले ही भारत के लिए अभी दूर की कौड़ी हैं, लेकिन नरेन्द्र मोदी सरकार ट्रेन सेट्स के तौर पर इनका एक छोटा वर्जन शुरू करने की तैयारी कर रही है। बुलेट ट्रेन की तर्ज पर चलने वाले ट्रेन सेट्स में कोचों को खींचने के लिए लोकमोटिव या इंजन नहीं होता। इसके नतीजे में पावर पूरे सिस्टम में समान तौर पर डिस्ट्रीब्यूट होती है और ट्रैवल का समय काफी कम हो जाता है। हालांकि, बुलेट ट्रेन की तरह इनके लिए अलग से ट्रैक बिछाने की जरूरत नहीं होती। शुरुआत में इन ट्रेन सेट्स का इम्पोर्ट किया जाएगा। बाद में इनकी मैन्युफैक्चरिंग देश में ही की जा सकती है।

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