इस समय स्वाइन फ्लू जैसे फ्लू की वजह से लोगो में भय बना हुआ है । इससे बचाव हेतु कपूर और इलायची के चूर्ण को कपडे में बाँध कर सूंघने का उपाय भी बताया गया है । पुराने समय में वातावरण को शुद्ध करने के लिए हमारे ऋषि मुनि हवन किया करते थे । हवन में डाली जाने वाली सामग्री में औषधिय गुण होते है । 5 मार्च को होली है । होलिका दहन को हम लोग हवन की तरह उपयोग कर सकते है । होलिका दहन में कपूर की 2-3 टिकिया जरूर से डाले । एक परिवार से 2-3 टिकिया, एक जगह की होली में लगभग 20 परिवार होली में डालें इसी प्रकार हर स्थान पर जलने वाली होली में किया जाये । होलिका दहन सभी स्थानों पर एक ही मुहूर्त में होता है , जब एक साथ इतने स्थानों पर इस प्रकार की धुआं उठेगी तो वातावरण में से कीटाणुओं का नाश होगा और वातावरण शुद्ध होगा । इस बात को सरलता से समझने के लिए हम एक फ़िल्मी दृश्य का उदाहरण लेते है :- फिल्म कृष 3 में एक शहर एक खतरनाक वायरस से संक्रमित हो जाता है , लोगो को वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए जल्द से जल्द एंटी डोस देना जरूरी होता है , कम समय में पूरे शहर के लोगो को एंटी डोज़ संभव नहीं होने पर उस दवा यानि एंटी...