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सोशल मीडिया की विश्वसनीयता से खिलवाड़, होगा सबका नुकसान

कल १६ फरवरी को पुस्तक मेले में गया सीधा गीता प्रेस के स्टाल पर, वहाँ पूछताछ की प्रेस के बंद होने की खबर जो सोशल मीडिया में आ रही है क्या वह सही है ? उन्होंने कहा किसी ने अफवाह उड़ाई है, गीता प्रेस अपने मिशन को पूरा करने द्रुत गति से कार्य कर रही है।
बड़े पैसे वाले लोग मेन स्ट्रीम मीडिया का प्रयोग कर सकते है पर हम जैसे गरीब कार्यकर्ताओ के लिए अपनी बात जन जन तक पहुँचाने का श्रेष्ठ माध्यम सोशल मीडिया है,
सोशल मीडिया में भ्रामक और अपुष्ट बातो को डालना सही खबरों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा करेगा जिसका नुकसान सबको होगा, मै ऐसे कुछ लोगो को जनता हु जो जानबूझकर भ्रामक पोस्ट डालते है मै उनसे पूछता हु भाई आपने ऐसा क्यों किया? तो वो कहते है की हम इस विषय पर लोगो का ध्यान आकृष्ट करना चाहते थे, झूठ बोलकर ध्यान आकर्षण? ये तो उस बी ग्रेड फ़िल्मी नायिका की हरकत हुई जो अपने नग्न फोटो खुद ही लीक करती है ध्यानाकर्षण के लिए।
1." एक भारतीय सैनिक दो पाकिस्तानियो के सर काट लाया और भारतीय सेना ने उसका कोर्ट मार्शल कर दिया, मोदी जी तक खबर पहुँचाओ।"
स्वदेश दीपक द्वारा लिखित,अरविन्द गौड़ द्वारा निर्देशित तथा शिल्पी मारवाह एवं साथियो द्वारा अभिनीत अस्मिता थिएटर ग्रुप द्वारा मंचित नाटक "कोर्ट मार्शल" के चित्रो को पोस्ट और शेयर कर कर के लोग खुद भी परेशान हो रहे है औरो को भी परेशान कर रहे हैं, इस नाटक की विषय वस्तु जातिगत ऊँच-नीच की विद्रूपताओं पर आधारित है,
2. "दो ट्रक फलौदी से कल शाम पांच बजे गौवंश भरकर निकले हैं जो वाया नागदा होकर अहमदाबाद जायेंगे गौरक्षक सतर्क रहे , आपको अपने माता पिता की कसम इसे शेयर करे" ,
पिछले एक साल से रोज़ ये मैसेज व्हट्स अप, फेसबुक में चल रहा है वास्तविक गौरक्षक परेशान हो रहे है, शायद साल भर पहले ये खबर सही भी रही हो पर लिखने वाले ने तारीख नहीं डाली और सब मिट्टी पलीद हो गया।
3. मुझे अभी तक ध्रुव पटेल नहीं मिला, किसी को मिला हो तो अविलम्ब मेरी बात करवाये ७८३५८१४५१०, उसे लगे लगाकर बधाई शुभकामनाये देनी है।
4. १९६५ के युद्ध में भारतीय सेना की मुस्लिम रेजिमेंट पाकिस्तान से मिल गयी?
भारतीय सेना में कभी मुस्लिम रेजिमेंट थी ही नहीं, जाति क्षेत्र आधारित सभी रेजिमेंट का निर्माण अंग्रेज़ो ने किया था, १८५७ की क्रांति के पश्चात सेना के मामले में अंग्रेज़ो ने कभी मुसलमानो पर भरोसा नहीं किया, १९६५ के युद्ध में ही अमर शहीद हवलदार अब्दुल हमीद को परमवीर चक्र मिला, अफसर करीम साहब ने भी सन ६५ में पाकिस्तान के विरुद्ध वीरतापूर्वक जंग लड़ी, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के कई कार्यक्रमों में वयोवृद्ध करीम साहब आज भी शिरकत करते हैं।

हमें अपने पुरुषार्थ के दम पर गौ रक्षा, राष्ट्र रक्षा करनी है ना कि भ्रामक समाचार से ,
ऐसी अनेकानेक बाते हैं, गीता प्रेस से बात करके कुछ बातें ध्यान में आई,
आपके पास भी कुछ ऐसा हो तो कमेंट में अवश्य लिखे,
जब सचमुच शेर आता है तो कोई गांववाला बचाने नहीं आता, तो शेर आया शेर आया के नाम से लोगो को बुलाकर ये ना कहो "बुद्धू बनाया लड्डू खिलाया" - बचपन में सभी ने ये कथा सुनी है।

By:-
Faiz Khan

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