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इन 5 आदतों से कमज़ोर होते हैं दांत, Healthy teeth के लिए क्या करें

दांतों की सेहत सही बनाए रखने के लिए कुछ बातों को ज़हन में रखा जाना जरूरी है। ऐसा करने से आप लंबे समय तक दांतों की तकलीफ से पूरी तरह बचे रह सकते हैं। आदतों में किए गए थोड़े-से बदलाव से भी आप बेहतर परिणाम पाने में सफल रहेंगे। 1-बर्फ चबाना-चूसना जिन लोगों को बर्फ या ऐसी ही ठंडी चीजों को बार-बार चबाने या चूसने की आदत होती है, उन्हें दांतों की सेहत खराब होने का खतरा अधिक होता है। ऐसा करने से दांतों में फ्रेक्चर होने की आशंका बनी रहती है। यदि आपको कोई ड्रिंक पीने के बाद बचे हुए बर्फ को चबाने की आदत है तो आप इसे त्याग दें। बर्फ चबाने से दांतों में छोटे-छोटे क्रेक बन जाते हैं, जो भविष्य में बड़े होकर दांतों की जड़ों तक पहुंच सकते हैं। ऐसा करना बहुत ही घातक होता है। क्या करें? ठंडी चीजों को कम से कम समय के लिए मुंह में रहने दें। मीठे खाद्य पदार्थों को ज्यादा देर तक चूसते न रहें। 2-दांतों को औजार समझना कुछ लोग दांतों को औजार की तरह इस्तेमाल करते हैं। वे इससे बोतलों के ढक्कन खोलते हैं या नट्स तोड़ते हैं। ऐसा करना दांतों के लिए नुकसानदेह होता है। इससे दांतों की जड़ें कमजोर हो जा...

शुद्ध घी से चढ़ाएं हनुमानजी को चोला, ये हैं पूजा के नियम

वर्तमान समय में हनुमानजी सबसे अधिक पूजे जाने वाले देवता हैं। इसलिए इन्हें कलयुग का जीवंत देवता भी कहा जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार दुनिया में ऐसा कोई सुख नहीं है जो हनुमानजी अपने भक्तों को नहीं दे सकते, लेकिन इसके लिए जरूरी है हनुमानजी के प्रति भक्त का समर्पण। 1 Next 3- हनुमानजी को जल चढ़ाते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि वह जल कुएं का हो और पूरी तरह से साफ-स्वच्छ हो। इसके अलावा भगवान श्रीहनुमान को गंगाजल चढ़ाने का विधान भी है। 2 Prev Next सुबह उठते ही ले हनुमानजी के 12 नाम धर्म ग्रंथों में हनुमानजी के प्रमुख 12 नाम बताए गए हैं, जिनके द्वारा उनकी स्तुति की जाती है। हनुमानजी के इन 12 नामों का जो रात में सोने से पहले व सुबह उठने पर अथवा यात्रा प्रारंभ करने से पहले पाठ करता है, उसके सभी भय दूर हो जाते हैं और उसे अपने जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं। हनुमानजी की 12 नामों वाली स्तुति तथा उन नामों के अर्थ इस प्रकार हैं- 3 6 Prev Next वायुपुत्र-  हनुमानजी का एक नाम वायुपुत्र भी है। पवनदेव के पुत्र होने के कारण ही इन्हें वायुपुत्र भी कहा जाता ह...

तीन सौ रोगों की दवा है सहजन, स्‍वस्‍थ रहने के लिए करें सेवन

आयुर्वेद में सहजन से तीन सौ रोगों का उपचार संभव है। यह उत्‍तर और दक्षि‍ण भारत दोनों में पाया जाता है। दक्षिण भारत में पाए जाने वाले सहजन के पेड़ से साल भर फलि‍यां नि‍कलती हैं। वहीं, उत्‍तर भारत में इसका पेड़ महज एक बार ही फलि‍यां देता है। स्‍वास्‍थ्‍य के हि‍साब से इसकी फली, हरी और सूखी पत्‍ति‍यों में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, कैल्‍शि‍यम, पोटेशि‍यम, आयरन, मैग्‍नीशि‍यम, वि‍टामि‍न-ए, सी और बी-काम्‍प्‍लेक्‍स प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। इनका सेवन कर कई बीमारि‍यों को बढ़ने से रोका जा सकता है। इसका बॉटेनिकल नाम 'मोरि‍गा ओलि‍फेरा' है। हिंदी में इसे सहजना, सुजना, सेंजन और मुनगा नाम से भी जानते हैं। इसका पौधा लगभग दस मीटर उंचाई वाला होता है, लेकिन लोग इसे डेढ़-दो मीटर की उंचाई से हर साल काट देते हैं, जिससे इसके फल-फूल-पत्तियों तक हाथ आसानी से पहुंच सके। इसकी कच्ची-हरी फलियां सबसे ज्‍यादा उपयोग में लाई जाती हैं। सर्दियां जाने के बाद इसके फूलों की भी सब्जी बनाकर खाई जाती है। फिर इसकी नर्म फलियों की सब्जी बनाई जाती है। आमतौर पर इसका सेवन ग्रामीण इलाकों में अधि‍क देखने को मि‍लता है।...

इन पांच सरकारी दफ्तरों में निकली हैं नौकरियां, जल्दी करें APPLY

1. National Insurance Company Limited   Online applications are invited for the following 1000 posts of  Assistants in Class-III Cadre in National Insurance Company Limited for various its offices across India.   Assistant :  1000 posts for various States ,  Qualification :  Graduate from a recognized University OR Pass in HSC/Equivalent (XII pass) examination with 60% marks (50% for Ex - servicemen, SC/ST and Persons with Disabilities); and the candidate should have passed in English as one of the subjects at SSC/ HSC/ Intermediate/ Graduation level; and Knowledge of Regional Language i.e. Language of the State of Recruitment is essential, Age :  21-28 years as on 30/11/2014. Relaxation as per rules.,  Pay Scale :  Rs. 7640 - 21050.   Selection by competitive exam on various dates in April 2015 followed by interview for selected candidates. Application Fee :  Rs.500/-  (Rs.50/- for SC/ST/PWD) to be paid onlin...

भारतीय स्वदेश प्रेम की चतुरता का एक उम्दा वाकया...

एक बार संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को ले कर चर्चा चल रही थी ।एक भारतीय प्रवक्ता बोलने के लिए खडा हुआ और अपना पक्ष रखने से पहले एक बहुत पुरानी कश्यप ऋषि की कहानी सुनाने के लिए कहा "एक बार महर्षि कश्यप घूमते घूमते कश्मीर पहुंचे जिनके नाम पर आज कश्मीर नाम पड़ा है ।वहा उन्होंने एक सुन्दर झील देखी तो उस झील में उनका नहाने का मन किया ।उन्होंने अपने कपड़े उतारे और झील में नहाने चले गए ।जब वो नहान कर बाहर निकले तो उनके कपडे वहा मौजूद  नहीं थे । उनके कपडे किसी पाकिस्तानी ने चुरा लिये थे ।" इतने में पाकिस्तानी प्रवक्ता चीखा और बोला "क्या बोल रहे हो?उस समय पाकिस्तान नहीं बना था ।" भारतीय प्रवक्ता मुस्कुराया और बोला" अब सब कुछ साफ़ हो चुका है । अब में अपना भाषण शुरू करना चाहता हूँ ।" "और ये पाकिस्तानी कहते है की कश्मीर इनका है ।" पुरा संयुक्त राष्ट्र सभा में ठहाकों के गूंज से भर गया ।। एक हिन्दुस्तानी होने के नाते ये मुझे बहुत पसंद आया । आप भी अपने दोस्तों के साथ शेयर करे । ॐ हर हर महादेव

मुस्लिम परिवार ने मंदिर में किया ‘बेटी’ का विवाह

इन दिनों देश में कुछ लोग अपनी बयानबाजी से सांप्रदायिक सद्भाव पर प्रहार कर रहे हैं। ऐसे समय में मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के एक मुस्लिम परिवार ने सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल पेश की। उन्होंने न केवल एक लावारिस मिली हिंदू बच्ची का पालन-पोषण किया, बल्कि उसकी हिंदू रीति-रिवाज के साथ मंदिर में शादी भी करवाई। राजधानी भोपाल के करीब नर्मदा नदी के बुदनी घाट के पास बने राम जानकी मंदिर में शनिवार रात का नजारा आम दिनों से जुदा था। यहां एक  मुस्लिम परिवार एक अनाथ युवती का हिंदू-रीति रिवाज से विवाह कर रहा था। लगभग 15 वर्ष पूर्व बरखेड़ा रेलवे स्टेशन पर शारदा नाम की लड़की लावारिस हालत में मिली थी। उसके शरीर पर काफी जख्म थे और उसे अपनाने को कोई तैयार नहीं हो रहा था। तब उस लड़की को रायसेन जिले के गौहरगंज की नवप्रभात संस्था को सौंप दिया गया था। इस संस्था का संचालन हसीन परवेज और डॉ. नूरुन्निसा करते हैं। इस संस्था ने शारदा का लालन-पालन अपने परिवार की बेटी की तरह किया। संस्था संचालकों ने शारदा को बेटी की तरह पाला और उसकी पढ़ाई में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। उसे ब्यूटीशन की पढ़ाई के लिए भोपाल भी भेजा।...

विश्वास की दौलत

सऊदी अरब में बुखारी नामक एक विद्वान रहते थे। वह अपनी ईमानदारी के लिए मशहूर थे। एक बार वह समुद्री जहाज से लंबी यात्रा पर निकले। उन्होंने सफर के खर्च के लिए एक हजार दीनार अपनी पोटली में बांध कर रख लिए। यात्रा के दौरान बुखारी की पहचान दूसरे यात्रियों से हुई। बुखारी उन्हें ज्ञान की बातें बताते। एक यात्री से उनकी नजदीकियां कुछ ज्यादा बढ़ गईं। एक दिन बातों-बातों में बुखारी ने उसे दीनार की पोटली दिखा दी। उस यात्री को लालच आ गया। उसने उनकी पोटली हथियाने की योजना बनाई।  एक सुबह उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया, ‘हाय मैं मार गया। मेरा एक हजार दीनार चोरी हो गया।’ वह रोने लगा। जहाज के कर्मचारियों ने कहा, ‘तुम घबराते क्यों हो। जिसने चोरी की होगी, वह यहीं होगा। हम एक-एक की तलाशी लेते हैं। वह पकड़ा जाएगा।’ यात्रियों की तलाशी शुरू हुई। जब बुखारी की बारी आई तो जहाज के कर्मचारियों और यात्रियों ने उनसे कहा, ‘अरे साहब, आपकी क्या तलाशी ली जाए। आप पर तो शक करना ही गुनाह है।’ यह सुन कर बुखारी बोले, ‘नहीं, जिसके दीनार चोरी हुए है उसके दिल में शक बना रहेगा। इसलिए मेरी भी तलाशी भी जाए।’ बुखारी क...