Skip to main content

जानिए पर्स में क्या रखने से हो सकता है लाभ और क्या न रखें

कुछ समय पहले तक जहां पर्स रखना स्टेटस सिंबल माना जाता था, वहीं आज के समय में पर्स रखना बहुत जरूरी हो गया है। पर्स रखने के कई फायदे हैं जैसे आप अपने पूरे पैसे पर्स में व्यवस्थित तरीके से रख सकते हैं। साथ ,ही पर्स में जरूरी कागजात, डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड आदि रखने का स्थान भी अलग से होता है। पर्स होने से आपको पैसों या अन्य जरूरी चीजों के लिए अपनी जेबें नहीं टटोलनी पड़ती।

ज्योतिष के अनुसार पर्स में यदि कुछ खास चीजें रखी जाएं तो इससे न सिर्फ बरकत बढ़ती है साथ ही शुभ फल भी प्राप्त होते हैं। और यदि पर्स में कुछ ऐसी चीजें रखी जाएं जिससे नेगेटिव एनर्जी आती है तो इससे नुकसान भी उठाना पड़ सकता है। आज हम आपको बता रहे हैं पर्स में क्या रखना चाहिए और क्यों। पर्स में क्या रखना चाहिए, इसकी जानकारी इस प्रकार है-

 मां लक्ष्मी की तस्वीर

यदि आप अपने पर्स में मां लक्ष्मी का छोटा फोटो रखते हैं तो इसका शुभ फल प्राप्त होता है। पर्स में मां लक्ष्मी का फोटो रखने से बरकत बनी रहती है और पर्स कभी खाली नहीं रहता। मगर एक बात का विशेष ध्यान रखें कि जैसे ही मां लक्ष्मी का फोटो खंडित या खराब हो उसे तुरंत बदल दें। खंडित हुई फोटो को नदी में प्रवाहित कर दें।
पीपल का अभिमंत्रित पत्ता
 
आप अपने पर्स में पीपल का अभिमंत्रित पत्ता भी रख सकते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार पीपल में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। इसका पत्ता पर्स में रखने से सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है। 
 
पीपल के पत्ते को अभिमंत्रित करने के लिए कोई शुभ मुहूर्त देखकर पीपल के पेड़ का एक पत्ता तोड़ लाएं। इस पत्ते को गंगाजल से धोकर पवित्र कर लें। अब इस पर केसर से श्रीं लिखें और इसे अपने पर्स में इस प्रकार रखें कि यह किसी को नजर न आएं।
श्रीयंत्र

मां लक्ष्मी की कृपा के लिए आप अपने पर्स में छोटे आकार का श्रीयंत्र भी रख सकते हैं। ज्योतिष शास्त्र में श्रीयंत्र को माता लक्ष्मी का ही स्वरूप माना जाता है। इस यंत्र की महिमा कई धर्म ग्रंथों में बताई गई है। पर्स में रखने से पहले इसका विधि-विधान पूर्वक पूजा अवश्य करनी चाहिए। 

श्रीयंत्र की तरह ही लक्ष्मी यंत्र व महालक्ष्मी यंत्र भी बहुत ही शुभ फल देने वाले माने गए हैं। यदि श्रीयंत्र न हो तो इनमें से कोई एक छोटे आकार का यंत्र आप अपने पर्स में रख सकते हैं। ये यंत्र सुख-समृद्धि प्रदान करने वाले तथा जीवन में उन्नति प्रदान करने वाले माने गए हैं।
गुरु की तस्वीर
 
बहुत से लोग ऐसे होते हैं जो अपने गुरु को बहुत मानते हैं। ये गुरु आध्यात्मिक या धार्मिक क्षेत्र से हो सकते हैं। आप अपने पर्स में अपने गुरु की छोटी तस्वीर भी रख सकते हैं। गुरु की तस्वीर पर्स में रखने से इसका सकारात्मक प्रभाव आपके जीवन पर पड़ेगा। 
 
गुरु की तस्वीर पर्स में होने से आप विकट परिस्थिति में भी राहत और आध्यात्मिक शांति महसूस करेंगे। गुरु की तस्वीर पर्स में होने से आपको धन से संबंधित परेशानियां नहीं होंगी।
चावल की पुडिय़ा

​ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चावल शुक्र ग्रह से संबंधित अनाज है। जीवन में सुख-समृद्धि व धन का कारक शुक्र ग्रह ही माना जाता है। इसलिए किसी भी पूजा-पाठ के दौरान देवी-देवताओं को तिलक करने के बाद चावल भी चढाएं जाते हैं। लक्ष्मी पूजा के दौरान चढाएं गए चावल बहुत ही विशेष होते हैं। 
 
मां लक्ष्मी को चढाएं गए चावलों में से कुछ दाने एक कागज की पुडिय़ा बनाकर रख लें। अब इस कागज की पुडिय़ा को अपने पर्स में रख लें। इससे आपको शुक्र ग्रह तथा माता लक्ष्मी से संबंधित अनुकूल फल प्राप्त होंगे।
मां लक्ष्मी से संबंधित अन्य चीजें 
 
आप अपने पर्स में मां लक्ष्मी से संबंधित अन्य चीजें जैसे- गोमती चक्र, समुद्री कौड़ी, कमल गट्टे, चांदी का सिक्का आदि भी रख सकते हैं। ये भी वस्तुएं मां लक्ष्मी को अति प्रिय है। इनमें से कोई भी चीज पर्स में रखने से पहले थोड़ी देर मां लक्ष्मी के चरणों में रखें। इसके बाद इसे पूरी श्रृद्धा से अपने पर्स में रख लें। 

इससे आपके जीवन में सकारात्मकता आने लगेगी और धन संबंधित मामले भी सुधरते जाएंगे। पर्स में रखने के बाद जब भी कोई वस्तु खंडित हो जाए तो उसे तुरंत नदी में बहा दें तथा दूसरी वस्तु पुन: मां लक्ष्मी को अर्पित करने के बाद अपने पर्स में रख लें।
ऐसी चीजें न रखें पर्स में-
 
देखने में आता है कि कुछ लोग पर्स में बहुत सी ऐसी चीजें रख लेते हैं, जिनका कोई उपयोग नहीं होता और लंबे समय तक पर्स में रखे रहने से उनमें नकारात्मक प्रभाव बढ़ जाता है। इसलिए जो भी कागजात या अन्य कोई चीज जो गैरजरूरी हो, उसे तुरंत अपने पर्स से निकाल दें।
 
पर्स में कभी भी कोई अश्लील चित्र या अन्य अश्लील सामग्री भी नहीं रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से पर्स की बरकत खत्म हो जाती है और जीवन में नकारात्मकता बढऩे लगती है। 

Comments

Popular posts from this blog

बड़ी आंखों वाली लड़की होती है भाग्यवान, ये हैं किस्मत वाली स्त्रियों के चिह्न

सभी पुरुष चाहते हैं कि उनका विवाह ऐसी स्त्री से हो जो भाग्यशाली हो व कुल का नाम ऊंचा करने वाली हो, लेकिन सामान्य रूप से किसी स्त्री को देखकर इस बारे में विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि सुंदर दिखने वाली स्त्री कुटिल भी हो सकती है, वहीं साधारण सी दिखने वाली स्त्री विचारवान हो सकती है। ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसी विधा भी है जिसके अनुसार किसी भी स्त्री के अंगों पर विचारकर उसके स्वभाव व चरित्र के बारे में काफी कुछ आसानी से जाना सकता है।  इस विधा को सामुद्रिक रहस्य कहते हैं। इस विधा का संपूर्ण वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखकर  सौभाग्यशाली स्त्रियों के विषय में आसानी से विचार किया जा सकता है-    1 of 8 Next श्लोक पूर्णचंद्रमुखी या च बालसूर्य-समप्रभा। विशालनेत्रा विम्बोष्ठी सा कन्या लभते सुखम् ।1। या च कांचनवर्णाभ रक्तपुष्परोरुहा। सहस्त्राणां तु नारीणां भवेत् सापि पतिव्रता ।2।  ...

वोटर भेड़ ही बने रहे तो ऊन के साथ चमड़ी भी उधेड़ लेंगे राजनीतिक दल

राजस्थान चुनाव की दस्तक के साथ हवा में उछल रहे नारों-जुमलों ने एक बार फिर मधु लिमये की बात याद दिला दी- 'जनता उस भेड़ की तरह है जिसकी चमड़ी पर से हम राजनीतिक दल वोटों की ऊन काटते हैं। ऊन काटे तब तक तो ठीक, लेकिन कुछ दल चमड़ी तक काट लेते हैं।' यहां भी राजनीतिक कुचक्र से बचाने की भावना भले ही हो, लेकिन मतदाता को भेड़ कहा गया। छह दशक की चुनावी यात्रा में यह साफ हो गया है कि राजनीतिक दल वोटर को क्या मानते हैं। जीत की जुगत के लिए हर बार बुनते हैं जुमले-नारे। गरीबी हटाओ, सिंहासन खाली करो, शाइनिंग इंडिया, बच्चा-बच्चा राम का.. जैसे नारे और उनका हश्र प्रमाण है कि राजनीतिक विचारधाराएं मृतप्राय: हो चुकी हैं। चुनावी सभाओं में साम्यवाद, समाजवाद, धार्मिक सहिष्णुता जैसे मुद्दों पर होने वाली बातें इतिहास बन गई है। उनकी जगह अब है- छद्म राष्ट्रवाद, धर्म-संप्रदाय, समुदाय में ध्रुवीकरण के जरिये पैठ बनाने के प्रयास। जो दल जिस शिद्दत से इन भावनाओं को भुना सका, धन-बाहुबल का बेहतर मिश्रण कर सका, वह सदन के हां-पक्ष में पहुंचा। बात जब राजस्थान विधानसभा की हैं तो हालात एकांतरा बुखार जैसी है। ऐसा बु...

अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर में अलग समुदाय का निर्माण; आखिर एक ही देश में इतनी संवैधानिक विषमता क्यों?

संविधान के कुछ जानकार कश्मीर के अलगाववाद के लिए अनुच्छेद 370 से अधिक अनुच्छेद 35ए को जिम्मेदार मानते हैं। अनुच्छेद 35ए संविधान का एक अदृश्य और रहस्यमय भाग है। यह संविधान के मूल पाठ में शामिल नहीं है। इसे परिशिष्ट के रूप में जोड़ा गया है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर राज्य की शासन योजना का आधार स्तंभ है। संविधान का मूल उद्देश्य देश को एकजुट करना होता है, किंतु इसकी भूमिका इसके उलट है। यह जम्मू-कश्मीर में एक अलग समुदाय का निर्माण करता है जिन्हें स्थाई नागरिक कहा जाता है और केवल उन्हें ही राज्य सरकार को चुनने से लेकर संपत्ति खरीदने का अधिकार हासिल है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि संविधान के इतने महत्वपूर्ण संशोधन में संसद की कोई भूमिका नहीं थी। न तो उसे सदन के पटल पर रखा गया और न ही उस पर बहस या मतदान हुआ। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 35ए में उल्लिखित विषयों पर बनाए गए कानून भारत के संविधान के अनुरूप होने जरूरी नहीं हैं। उनका उल्लंघन भी हो सकता है और अंतर्विरोध होने पर भारत के संविधान की जगह इन कानूनों को मान्यता दी जाएगी। इस अधिकार के तहत विधानसभा को जम्मू-कश्मीर के स्थाई नागरिकों की परिभाषा त...