Skip to main content

Hirday Vidarak

शकीना ने गुनाह किया था , वह मुसलमान होते हुए किसी हिन्दू लडके से शादी भला कैसे कर सकती थी ????
इस्लाम का कानून इसे भला कैसे इजाजत देता???
ऒर फिर इसके लिय न्यायालय? ??
न्यायालय में तो शकीना के इस गुनाह के लिये फरियाद करने का भी प्रावधान नहीं है हमारे संविधान में! !!!!!!
.
.
तब???
.
इस्लाम के स्वयंभू ठेकेदार , इस्लाम की 'रक्षा' के लिये शकिना को खुद ही तो दण्डित करेंगे???
ऒर चारा भी क्या है???
.
ऒर फिर आप जानते ही हो कि इस्लाम में दण्ड की क्या विधि है ।
घॊर यातनायें!! हाँ घोर यातनायें ही तो किसी भी गुनाह का दण्ड होता है इस्लामिक कानून में ।
.
ये यातनाएं कितनी घोर हो सकती हैं? आप सोच सकते हैं क्या??
समाचार पत्र मे प्रकाशित समाचार के अनुसार शांहजहाँ ने शकीना को कितनी ही बार समझाया, डराया, धमकाया कि कमल से मिलना छोड दे, किन्तु शकीना कमल से ही शादी करना चाहती थी । जिसके परिणाम स्वरूप शांहजहा ने अपने अन्य साथियों के साथ 8 नवम्बर को शकीना को लाठी डण्डों से पीटा, वह अपनी जिद पर अडिग रही तो उसका सामूहिक बलात्कार किया गया, वह फिर भी रोती चीखती कमल से ही शादी करने की जिद पकडे रही तो उसके गुप्तांगों पर लात घूँसे बरसाते गये , लेकिन ये ढीठ लडकी कमल के प्रेम मे इतनी पागल थी कि फिर भी नही मानी तो उसके शरीर में डण्डा ...........................
.
.
अबे सालों मोमबत्ती वालों, ऒर ‪#‎kissoflove‬ वालों अब तुम्हारी अम्मा का गर्भपात हो गया क्या जिसे संभालने में लगे हो, कि तुम्हे एक मासूम जिन्दगी पर हुआ ये अत्याचार नही दिखा? ??
क्या इसलिय नही दिखा कि शकीना हिन्दू लडके से प्रेम करती थी ?? कहाँ है महिला आयोग???
.
"मेरे दर्द की इंतहा ना पूछ 'खरे',
मैं रो पडता हूँ ये सोच कर कि जालिम जमाने में मै भी एक बेटी का बाप हूँ । "
आक्रोशित
प्रवेश कुमार

Comments

Popular posts from this blog

बड़ी आंखों वाली लड़की होती है भाग्यवान, ये हैं किस्मत वाली स्त्रियों के चिह्न

सभी पुरुष चाहते हैं कि उनका विवाह ऐसी स्त्री से हो जो भाग्यशाली हो व कुल का नाम ऊंचा करने वाली हो, लेकिन सामान्य रूप से किसी स्त्री को देखकर इस बारे में विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि सुंदर दिखने वाली स्त्री कुटिल भी हो सकती है, वहीं साधारण सी दिखने वाली स्त्री विचारवान हो सकती है। ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसी विधा भी है जिसके अनुसार किसी भी स्त्री के अंगों पर विचारकर उसके स्वभाव व चरित्र के बारे में काफी कुछ आसानी से जाना सकता है।  इस विधा को सामुद्रिक रहस्य कहते हैं। इस विधा का संपूर्ण वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखकर  सौभाग्यशाली स्त्रियों के विषय में आसानी से विचार किया जा सकता है-    1 of 8 Next श्लोक पूर्णचंद्रमुखी या च बालसूर्य-समप्रभा। विशालनेत्रा विम्बोष्ठी सा कन्या लभते सुखम् ।1। या च कांचनवर्णाभ रक्तपुष्परोरुहा। सहस्त्राणां तु नारीणां भवेत् सापि पतिव्रता ।2।  ...

मान्यताएं: मंदिर से जूते-चप्पल चोरी हो जाए तो समझें ये बातें

मंदिर से जूते-चप्पल चोरी होना आम बात है। इस चोरी को रोकने के लिए सभी बड़े मंदिरों में जूते-चप्पल रखने के लिए अलग से सुरक्षित व्यवस्था की जाती है। इस व्यवस्था के बावजूद भी कई बार लोगों के जूते-चप्पल चोरी हो जाते हैं। किसी भी प्रकार की चोरी को अशुभ माना जाता है, लेकिन पुरानी मान्यता है कि जूते-चप्पल चोरी होना शुभ है।   यदि शनिवार के दिन ऐसा होता है तो इससे शनि के दोषों में राहत मिलती है। काफी लोग जो पुरानी मान्यताओं को जानते हैं, वे अपनी इच्छा से ही दान के रूप में मंदिरों के बाहर जूते-चप्पल छोड़ आते हैं। इससे पुण्य बढ़ता है।   पैरों में होता है शनि का वास   ज्योतिष शास्त्र में शनि को क्रूर और कठोर ग्रह माना गया है। शनि जब किसी व्यक्ति को विपरीत फल देता है तो उससे कड़ी मेहनत करवाता है और नाम मात्र का प्रतिफल प्रदान करता है। जिन लोगों की राशि पर साढ़ेसाती या ढय्या चली रही होती है या कुंडली में शनि शुभ स्थान पर न हो तो उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।   हमारे शरीर के सभी अंग ग्रहों से प्रभावित होते हैं। त्वचा (चमड़ी) और पैरों में श...

अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर में अलग समुदाय का निर्माण; आखिर एक ही देश में इतनी संवैधानिक विषमता क्यों?

संविधान के कुछ जानकार कश्मीर के अलगाववाद के लिए अनुच्छेद 370 से अधिक अनुच्छेद 35ए को जिम्मेदार मानते हैं। अनुच्छेद 35ए संविधान का एक अदृश्य और रहस्यमय भाग है। यह संविधान के मूल पाठ में शामिल नहीं है। इसे परिशिष्ट के रूप में जोड़ा गया है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर राज्य की शासन योजना का आधार स्तंभ है। संविधान का मूल उद्देश्य देश को एकजुट करना होता है, किंतु इसकी भूमिका इसके उलट है। यह जम्मू-कश्मीर में एक अलग समुदाय का निर्माण करता है जिन्हें स्थाई नागरिक कहा जाता है और केवल उन्हें ही राज्य सरकार को चुनने से लेकर संपत्ति खरीदने का अधिकार हासिल है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि संविधान के इतने महत्वपूर्ण संशोधन में संसद की कोई भूमिका नहीं थी। न तो उसे सदन के पटल पर रखा गया और न ही उस पर बहस या मतदान हुआ। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 35ए में उल्लिखित विषयों पर बनाए गए कानून भारत के संविधान के अनुरूप होने जरूरी नहीं हैं। उनका उल्लंघन भी हो सकता है और अंतर्विरोध होने पर भारत के संविधान की जगह इन कानूनों को मान्यता दी जाएगी। इस अधिकार के तहत विधानसभा को जम्मू-कश्मीर के स्थाई नागरिकों की परिभाषा त...