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बच्चे को जन्म देते ही निकाली जाती है 'मां

देव परंपरा के नाम पर देवभूमि हिमाचल के कई गांवों में आज भी ऐसी कई अजीबोगरीब प्रथाएं हैं, जिस पर यकीन करना मुश्किल होता है। बच्चों के जन्म पर भी इस तरह की प्रथाओं के बारे में अक्सर सुनने को मिलता है।

देश-दुनिया में प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को जहां जमीन छूने नहीं दी जाती है, वहीं प्राचीनतम लोकतंत्र कहे जाने वाले कुल्लू के मलाणा गांव में बच्चे को जन्म देते ही मां को घर से बाहर निकाल दिया जाता है।

बारिश हो या फिर बर्फबारी, प्रसव के बाद मां और बच्चे को करीब पंद्रह दिन तक घर से दूर बने तंबू में रहना पड़ता है। दोनों को घर से अन्न-दूध तक नसीब नहीं होता।
गांव के लोग ही इन्हें खाना देते हैं। महिला पंद्रह दिन तक अपने कपड़े खुद धोती है। जिस दिन जच्चा-बच्चा घर में प्रवेश करते हैं, उससे पहले पूरे घर की लिपाई-पुताई कर शुद्धि की जाती है।

मलाणा के अलावा कुल्लू के कई अन्य गांवों और ऊपरी शिमला के विभिन्न इलाकों में 21वीं शताब्दी में भी देवता और शुद्धि के नाम पर प्रसव पर ये सब किया जाता है।

कई इलाकों में तो महिला को प्रसव से दो-तीन दिन पहले घर से निकाल कर गौशाला में भेज दिया जाता है।
मलाणा पंचायत के पूर्व प्रधान भीम राम, कारदार रिड़कू राम, गंगा राम, मोती राम का कहना है कि आज भी गांव में देव कानून के अनुसार परंपराओं का निर्वहन हो रहा है। उनके मुताबिक देव प्रथा और देव आदेशों का पालन नहीं किया गया तो परिवार ही नहीं पूरा गांव देवता के दंड का भागी होता है।

गांव जाकर सच्चाई पता करेंगे
महिला आयोग हिमाचल जैनब चंदेल मामले की सच्चाई जानने के लिए मलाणा गांव का दौरा करेंगे। अगर ऐसा हो रहा है तो सही नहीं है। महिलाओं को भी इसके खिलाफ आगे आना चाहिए। लोगों को इस बारे में जागरूक होने की आवश्यकता है।

Amar Ujala

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