Skip to main content

Posts

इन 6 को कभी छोटा नहीं समझना चाहिए, बाद में पछताना पड़ता है

श्रीरामचरितमानस एक ऐसा ग्रंथ है, जिसमें जीवन प्रबंधन से जुड़े अनेक सूत्र छिपे हैं। इस पवित्र ग्रंथ की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की है। उन्होंने अपनी चौपाइयों में लाइफ मैनेजमेंट की अनेक ऐसी बातें बताई हैं, जो वर्तमान समय में भी प्रासंगिक हैं। श्रीरामचरितमानस के अरण्यकांड में जब शूर्पणखा लक्ष्मण द्वारा नाक, कान काटे जाने के बाद रावण के पास जाती है तब वह रावण को बताती है कि किन 6 को कभी छोटा यानी कमजोर नहीं समझना चाहिए। आज हम आपको उन्हीं 6 के बारे में बता रहे हैं- सोरठा-  रिपु रुज पावक पाप प्रभु अहि गनिअ न छोट करि।               अस कहि बिबिध बिलाप करि लागी रोदन करन।। अर्थात-  शत्रु, रोग, अग्नि, पाप, स्वामी और सर्प को छोटा नहीं समझना चाहिए। ऐसा कहकर शूर्पणखा अनेक प्रकार से विलाप करके रोने लगी। शत्रु-  शत्रु भले ही कितना भी छोटा क्यों न हो, लेकिन उससे हमेशा सावधान रहना चाहिए क्योंकि कई बार छोटे शत्रु भी ऐसा अनिष्ट कर देते हैं, जिसके कारण बाद में पछताना पड़ता है। यदि छोटे-छोटे शत्रु राजा एकत्रित होकर किसी चक्रवती राजा पर एक साथ हमला कर...

तुलसीदासजी का कहना है, ये 3 लोग मीठा बोलें तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए

तुलसीदासजी अपनी शिक्षाप्रद दोहों और चौपाईयों के लिए जाने जाते हैं रामचरितमानस उनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है। वे भगवान राम के अनन्य भक्तों में से एक माने जाते हैं। कहा जाता है कि वे एक मात्र ऐसे इंसान हैं जिन्होंने कलियुग में श्रीरामजी का उनके परिवार सहित दर्शन किया है। तुलसीदासजी ने कई ऐसे दोहे लिखे हैं जो किसी के भी जीवन में सफलता का सूत्र साबित हो सकते हैं। ऐसा ही एक दोहा है जिसमें ये बताया गया है कि यदि इस दोहे में बताए गए तीन खास लोग आपसे मीठा बोलते हैं तो वो आपके लिए जहर के समान साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कौन से हैं वो तीन लोग... सचिव बैद गुरु तीनि जौं प्रिय बोलहिं भय आस। राज धर्म तन तीनि कर होइ बेगिहीं नास।  अर्थ- गोस्वामीजी कहते हैं कि मंत्री, वैद्य और गुरु ये तीन यदि भय या लाभ की आशा से (हित की बात न कहकर) प्रिय बोलते हैं, तो राज्य, शरीर और धर्म इन तीन का शीघ्र ही नाश हो जाता है। इसलिए इन तीनों में से कोई भी आप से मीठा बोले तो तुरंत सर्तक हो जाएं और अपने विवेक से सही और गलत का निर्णय लें। अंधविश्वास न करें।    दया धर्म का मूल  है पाप मूल ...

ऐसे पहचानें कौन सा नोट है असली और कौन सा नकली, नहीं खाएंगे धोखा

नकली नोटों का करोबार इतना फैल चुका है कि कभी भी किसी के साथ भी घोखा हो सकता है। नकली नोट को भी इनती सफाई से तैयार किया जाता है कि उन्हें देखकर कोई भी गच्च खा सकता है। आरबीआई ने इसके मद्देनजर साल 2005 से पहले जारी किए गए नोटों बदलने का फैसला किया था।     आपको बता दें कि आरबीआई ने देश में कालेधन और नकली नोटों की समस्या से निपटने के लिए ये फैसला लिया। जनवरी 2015 से बाजार में पुराने नोट नहीं दिखेंगे। बैंक इन्हें वापस ले लेगा। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि असली और नकली नोटों की पहचान कैसे की जाए। हम आपको 1000 और 500 के नोटों की असली या नकली होने की सटीक पहचान करने के तरीके बता रहे हैं।   असली नोट और नकली नोट में आइडेंटिफिकेशन मार्क का अंतर होता है।  वाटर मार्क किसी भी नोट पर वाटर मार्क जरूर देखें। सभी असलनी नोटों में महात्मागांधी की फोटो बनी है। उसी फोटो को हल्के शेड में वाटरमार्क में भी बनाया गया है। जब नोट  को आप थोड़ा तीरछा करेंगे तो यह दिखाई देगी।  सिक्योरिटी थ्रेड   इसके बाद सिक्योरिटी थ्रेड पर गौर करें। नोट के बीच में य...

ऐेसे जानिए आपकी किस्मत में है या नहीं विदेश जाने के योग

आज के दौर में काफी अधिक लोग ऐसे हैं जो विदेश यात्रा करना चाहते हैं, लेकिन बहुत ही कम लोगों की यह इच्छा पूरी हो पाती है। जो लोग विदेश यात्रा करते हैं, उनकी हथेली में या शरीर पर कुछ ज्योतिषीय संकेत छिपे होते हैं। ज्योतिष के अनुसार कुछ ऐसे निशान बताए गए हैं जो बताते हैं कि व्यक्ति कभी विदेश जाएगा या नहीं...   रेखाएं और तिल बताते हैं व्यक्ति विदेश जाएगा या नहीं   हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली की कुछ विशेष रेखाएं दर्शाती हैं कि आपके लिए विदेश यात्रा के योग हैं या नहीं। साथ ही, शरीर पर कुछ खास अंगों के तिल भी इस संबंध में संभावनाएं व्यक्त करते हैं। यहां जानिए विदेश यात्रा के योग बताने वाले निशान कौन-कौन से हैं...   हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार हथेली में शुक्र पर्वत (अंगूठे के नीचे वाले भाग को शुक्र पर्वत कहते हैं।) के सामने ही हथेली के दूसरी ओर चंद्र पर्वत (Moon Mount) होता है। चंद्र पर्वत व्यक्ति की कल्पना शक्ति, बौद्धिक क्षमता, मनोवृत्ति, कला प्रेम आदि को दर्शाता है। इस पर्वत पर कुछ रेखाएं विदेश यात्रा के संबंध में संभावनाएं बताती हैं।   हथेली म...
बीवी की कोशिस के चक्कर में साली बोतल खाली हो जाती है,, 2 पैग लगाये,,, मस्ती छाई,,,बीवी से सलाद माँगा,, नीबू निचोड़ लाई, चढ़ी चढ़ाई उतर गई,,, फिर 2 लगाए,, पानी माँगा,, नीबू मिला लाई,, साली फिर बैटरी डाउन हो गई, चक्कर समझ नहीं आया आज नशा पुराने मोबाईल की बैटरी की तरह फुर क्यों हो रहा है,,, फिर 2 लगाये,, पता चला इस बार पानी में इनो मिला लाई थी,,, गया डकार के साथ नशा,, में बोला भागवान कर क्या रही हो,,, बोली जी आपकी सेहत का ख्याल,, अरे मैडम सेहत के चक्कर में तुमने बोतल पिला डाली फिर भी रह गया प्यासा ख्याली,, भाई अपना सलाद और पानी खुद ही ले लिया करो वरना 2 के चक्कर में 8 भी कम पड़ेंगे....

करते रहेंगे ये 15 काम तो मिलेगा भाग्य का साथ, बढ़ सकती है इनकम

  पुराने समय से ही सुख और समृद्धि के लिए कई प्रकार की परंपराएं और नियम बताए गए हैं। कई घरों में आज भी इन परंपरागत नियमों का पालन किया जाता है। माना जाता है कि जहां ये परंपराएं प्रचलित हैं, वहां लक्ष्मी कृपा के साथ ही देवी अन्नपूर्णा की कृपा भी बनी रहती है। लक्ष्मी कृपा से धन संबंधी कार्यों में सफलता मिलती है और देवी अन्नपूर्णा की कृपा से घर में अनाज और खान-पान संबंधी अन्य चीजों की समृद्धि बनी रहती है। यदि आप भी मां लक्ष्मी और अन्नपूर्णा देवी को प्रसन्न रखना चाहते हैं तो यहां कुछ ऐसे काम बताए जा रहे हैं, जिनका ध्यान नियमित रूप से रखना चाहिए। - हर रोज सुबह-सुबह कुछ देर के लिए भजन या देवी-देवताओं के मंत्र सुनना चाहिए। मंत्र और भजनों के स्वर से घर का वातावरण पवित्र होता है और मन के बुरे विचार खत्म होते हैं। मंत्रों के स्वरों से मां लक्ष्मी और मां अन्नपूर्णा प्रसन्न होती हैं। - घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके नहीं रखना चाहिए। झाड़ू पर पैर भी नहीं लगाना चाहिए। ना ही झाड़ू के ऊपर से निकलना चाहिए। जो लोग झाड़ू के संबंध में इन बातों का ध्यान नहीं रखते हैं, उनके घर से बरकत चली जात...

मीडिया का दोगला पन…

मैं आज यहाँ जो लिखने जा रहा हूँ, हो सकता है कुछ लोगों की राय इससे भिन्न हो, पर बात बिलकुल सही है, आपने देखा होगा और शायद किया भी हो, हमारे देश में जब भी कोई बुरी घटना घटती है, तो अखवार और टीवी वाले समाज को कोसते हैं, कि क्या हो रहा है है देश में, जैसे अभी दो या तीन दिन पुरानी बात है , कर्नाटका के बंगलुरु में कुछ मनचलों ने कुछ महिलाओं को बुरी तरह से परेशान किया दुसरे सब्दों में छेड़ा , वो महिलाऐं बेचारी अपनी कार के अंदर छुप गयी और दरवाजे और खिड़की बंद कर ली, उन बदमाशों ने फिर भी उनका पीछा नहीं छोड़ा तो वो सहायता के चिल्लाने लगीं, लोगों का ध्यान उनकी तरफ नहीं गया, जबकि एक सभ्य नागरिक का कर्तब्य है की यदि बच्चे, बुड्ढे या महिलाओं पर अत्याचार हो रहा हो तो उसको अपने प्राणों से बढ़कर इनकी रक्षा करनी चाहिए। पर ऐसा हुआ नहीं, उल्टा लोग हँसतेhue गुज़र रहे थे. जो कि बहुत ही लज्जात्मक है। इस बात को हमारे अखवार और टीवी वाले बंधुओं ने पूरी तन्मयता से उठाया, जो की अच्छे नागरिक का कर्तब्य भी है, ऐसा देखकर अच्छा लगा, अब इन्ही अखवार और टीवी वालों ने एक दूसरी घटना को भी बहुत बढ़चढ़ कर दिखया जो कि उत्तर प्र...