Skip to main content

पेट्रोल चोरी - धोखा या लापरवाही ??

 लोगो आगाह और जागरूक करने मे सहयोग दे. और साथ मे इन नसीहतों का पालन भी करें
आजकल पेट्रोल चोरी एक आम बात है और हम ये सब जानते हुए भी अंजान बने रहते है दरअसल ये चोरी नही हुमारी लापरवाही है जिसकी वजह से हम रोज थगे जाते है आइए जाने क्या है दस्तक जो हमे ठगे जाने का संकेत देती है :
1. पेट्रोल फिल्लिंग के लिए गाड़ी आगे लगाने के लिए कहना ताकि आप मशीन पर सही मुल्य या मात्रा ना देख सके या वह आपके और मीटर के बीच मे खड़ा हो सके
2. मशीन मे पहले से फीड मात्रा से आगे से पेट्रोल भरना( मीटर पर शुन्य सेट ना करना केवल बटन पर हान्थ रखना और उसी वक़्त पेट्रोल सप्लाइ ऑन कर देना ) अगर आप इस पर ध्यान दे रहे होते है तो अचानक आप को बातों मे लगा लेना ताकि आपका ध्यान भटक जाए अंत मे आपको यही जवाब मिलेगा आपने ध्यान नही दिया हमने तो ज़ीरो पर सेट किया था
3. अगर आपने 500 Rs का पेट्रोल भरने को कहा तो पहले 100 Rs का पेट्रोल डालना और जब आप कहते है की मैने 500 Rs कहा था तो मीटर रिसेट किए बिना ही 400 की रीडिंग तक पेट्रोल दालना तो 100+400 मतलब 500 की वजय 400 Rs का पेट्रोल देना और ये सब मात्र 3-4 सेकेंड्स मे हो जाता है नज़र हटी और धोखा हुआ
4. फिलिंग मशीन के नोज़ेल पर हान्थ रखे रहना ताकि आप उस पर लगे पारदर्शी काँच से यह ना देख सके की की क्या पेट्रोल सही मे पेट्रोल टैंक मे जेया भी रहा है या नही
5. पेट्रोल की मात्रा फीड करने के बाद भी नोज़ेल हॅंड से पेट्रोल के प्रवाह को रोकने के लिए आतुर रहना
6. मशीन मे गड़बड़ी करना जिससे की फीड मात्रा से अपने आप ही निशित मात्रा मे चोरी करना जो की एक निशित मात्रा जैसे की 100, 200, 500, रुपये या 2, 3 या 4 लीटर की निशित मात्रा के साथ ही होता है!
7. आखरी और सबसे बड़ी वजह ये बातें शायद नही जानते हों पर शक़ तो ज़रूर होता होगा फिर भी चुप रहना हुमारी यही आदत उन्हे चोरी के लिए प्रोत्साहित करती है चाहे वा 50 पैसे का कम पेट्रोल डालना ही क्यूँ ना हो
अगली बार जब भी पेट्रोल भरवाने जाएँ तो इन बातों का ध्यान ज़रूर रखें और उनकी बात मानने से माना करे. और ये चोरी नही आकी लापरवाही है जो जुर्म की दस्तक को पढ़ नही पाती है

Comments

Popular posts from this blog

बड़ी आंखों वाली लड़की होती है भाग्यवान, ये हैं किस्मत वाली स्त्रियों के चिह्न

सभी पुरुष चाहते हैं कि उनका विवाह ऐसी स्त्री से हो जो भाग्यशाली हो व कुल का नाम ऊंचा करने वाली हो, लेकिन सामान्य रूप से किसी स्त्री को देखकर इस बारे में विचार नहीं किया जा सकता क्योंकि सुंदर दिखने वाली स्त्री कुटिल भी हो सकती है, वहीं साधारण सी दिखने वाली स्त्री विचारवान हो सकती है। ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसी विधा भी है जिसके अनुसार किसी भी स्त्री के अंगों पर विचारकर उसके स्वभाव व चरित्र के बारे में काफी कुछ आसानी से जाना सकता है।  इस विधा को सामुद्रिक रहस्य कहते हैं। इस विधा का संपूर्ण वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखकर  सौभाग्यशाली स्त्रियों के विषय में आसानी से विचार किया जा सकता है-    1 of 8 Next श्लोक पूर्णचंद्रमुखी या च बालसूर्य-समप्रभा। विशालनेत्रा विम्बोष्ठी सा कन्या लभते सुखम् ।1। या च कांचनवर्णाभ रक्तपुष्परोरुहा। सहस्त्राणां तु नारीणां भवेत् सापि पतिव्रता ।2।  ...

मान्यताएं: मंदिर से जूते-चप्पल चोरी हो जाए तो समझें ये बातें

मंदिर से जूते-चप्पल चोरी होना आम बात है। इस चोरी को रोकने के लिए सभी बड़े मंदिरों में जूते-चप्पल रखने के लिए अलग से सुरक्षित व्यवस्था की जाती है। इस व्यवस्था के बावजूद भी कई बार लोगों के जूते-चप्पल चोरी हो जाते हैं। किसी भी प्रकार की चोरी को अशुभ माना जाता है, लेकिन पुरानी मान्यता है कि जूते-चप्पल चोरी होना शुभ है।   यदि शनिवार के दिन ऐसा होता है तो इससे शनि के दोषों में राहत मिलती है। काफी लोग जो पुरानी मान्यताओं को जानते हैं, वे अपनी इच्छा से ही दान के रूप में मंदिरों के बाहर जूते-चप्पल छोड़ आते हैं। इससे पुण्य बढ़ता है।   पैरों में होता है शनि का वास   ज्योतिष शास्त्र में शनि को क्रूर और कठोर ग्रह माना गया है। शनि जब किसी व्यक्ति को विपरीत फल देता है तो उससे कड़ी मेहनत करवाता है और नाम मात्र का प्रतिफल प्रदान करता है। जिन लोगों की राशि पर साढ़ेसाती या ढय्या चली रही होती है या कुंडली में शनि शुभ स्थान पर न हो तो उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।   हमारे शरीर के सभी अंग ग्रहों से प्रभावित होते हैं। त्वचा (चमड़ी) और पैरों में श...

अनुच्छेद 35ए, जम्मू-कश्मीर में अलग समुदाय का निर्माण; आखिर एक ही देश में इतनी संवैधानिक विषमता क्यों?

संविधान के कुछ जानकार कश्मीर के अलगाववाद के लिए अनुच्छेद 370 से अधिक अनुच्छेद 35ए को जिम्मेदार मानते हैं। अनुच्छेद 35ए संविधान का एक अदृश्य और रहस्यमय भाग है। यह संविधान के मूल पाठ में शामिल नहीं है। इसे परिशिष्ट के रूप में जोड़ा गया है, लेकिन यह जम्मू-कश्मीर राज्य की शासन योजना का आधार स्तंभ है। संविधान का मूल उद्देश्य देश को एकजुट करना होता है, किंतु इसकी भूमिका इसके उलट है। यह जम्मू-कश्मीर में एक अलग समुदाय का निर्माण करता है जिन्हें स्थाई नागरिक कहा जाता है और केवल उन्हें ही राज्य सरकार को चुनने से लेकर संपत्ति खरीदने का अधिकार हासिल है। सबसे बड़ा आश्चर्य तो यह है कि संविधान के इतने महत्वपूर्ण संशोधन में संसद की कोई भूमिका नहीं थी। न तो उसे सदन के पटल पर रखा गया और न ही उस पर बहस या मतदान हुआ। इसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 35ए में उल्लिखित विषयों पर बनाए गए कानून भारत के संविधान के अनुरूप होने जरूरी नहीं हैं। उनका उल्लंघन भी हो सकता है और अंतर्विरोध होने पर भारत के संविधान की जगह इन कानूनों को मान्यता दी जाएगी। इस अधिकार के तहत विधानसभा को जम्मू-कश्मीर के स्थाई नागरिकों की परिभाषा त...