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ये हैं वो 5 काम, जिन्हे करने वाले को कभी शांति नहीं मिलती

जब इंसान का बुरा वक्त आता है, तब उसकी यही चाहत और कोशिश होती है कि किसी भी तरह उससे बाहर निकल पाए ताकि आगे तरक्की कर सके। यह सोच किसी भी तरह से गलत भी नहीं है, लेकिन आज बढ़ती भौतिक सुखों की चकाचौंध इंसान के मन में बहुत कम वक्त में ज्यादा पाने की लालसा पैदा कर रही है। इसके चलते आगे बढऩे के लिए कुछ गलत सोच व तरीकों को अपनाना भी बुद्धिमत्ता का पैमाना माने जाने लगा है। 

धर्म शास्त्रों के नजरिए से तरक्की के लिए क्षणभर के लिए भी अपनाया गया गलत उपाय आखिर में पतन का कारण बन सकता है, जिससे उबरने के लिए उम्र और लंबा समय भी गुजर जाता है। यहां जानिए हिन्दू धर्मग्रंथ गरुड़पुराण में  बताए गए ऐसे ही 5 काम, जिनको तरक्की, स्वार्थ या क्षणिक सुख और लाभ के लिए कभी न अपनाना सुखद व शांत जीवन के जरूरी बताया गया है- 
 
मित्रता में कपट- अपने फायदे के लिए कपटपूर्वक मित्रता करना व फिर छल करना, मित्रता को शत्रुता में बदलने का कारण बनती है। साथ ही बदनामी और अपयश का कारण भी। 

बिना मेहनत के विद्या अर्जन- कुशलता और कामयाबी के लिए संपूर्ण विद्या, व ज्ञान अहम होता है, जो समर्पण, परिश्रम के बिना असंभव है, लेकिन तरक्की के लिए धन या किसी अन्य अनुचित तरीकों से शिक्षा या कौशलता का प्रमाण पत्र बिना मेहनत के पाना लंबे समय के लिए मान-सम्मान और तरक्की के लिए घातक ही साबित होता है। 

कठोर व्यवहार से स्त्री को वश में करना- स्त्री से रिश्ता मां, बहन, पत्नी, बेटी किसी भी रूप में हो, प्रेम और स्नेह के साथ निभाने पर ही सुख देता है। किंतु स्त्री को कमतर मानकर, बुरी मानसिकता या भोग का साधन समझ बुरे व्यवहार से अधिकार या वश में करने की कोशिश आखिरकार मान-प्रतिष्ठा को धूमिल ही नहीं करती, बल्कि जीवन को दु:खों से भर सकती है। 

पाप से धर्म कमाना- धर्म के नाम पर कर्म, व्यवहार, बोल, वेशभूषा द्वारा ऊपरी दिखावा कर धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाना या गुमराह कर लाभ लेना पाप माना गया है, जो आखिरकार जीवन के लिए संकट का कारण भी बन सकता है।

दूसरों को दु:खी कर धन अर्जन- अपने सुखों के लिए दूसरों के साथ छल, कपट, बेईमानी या अन्य किन्हीं गलत तरीकों को अपनाकर धन संग्रह करना, धार्मिक नजरिए से न केवल पाप है, बल्कि व्यावहारिक रूप से भी इसके घातक नतीजे विरोध और शत्रुता, कलह भरे जीवन के रूप में सामने आते हैं।


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