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यह विरोध गलत

नगर निकाय चुनाव में विजयी प्रत्याशियों के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मेरठ और अलीगढ़ में वंदे मातरम को लेकर खूब हंगामा हुआ। मेरठ में तो वंदे मातरम गान के समय नवनिर्वाचित महापौर जहां अपनी कुर्सी तक से नहीं उठीं वहीं उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी भी की। अलीगढ़ में बवाल इतना बढ़ा कि महापौर की गाड़ी पर पथराव तक हो गया। पुलिस ने किसी तरह भीड़ को तितर-बितर कर समारोह सम्पन्न करवाया। इस तरह बीता था शहर की सरकार का पहला दिन। वंदे मातरम का विरोध ठीक नहीं। देश बड़ा होता है। वंदे मातरम को विरोध का माध्यम बनाना उचित नहीं कहा जा सकता। इससे समाज में सद्भाव की खाई और चौड़ी होगी। राजनेताओं को भी दलगत राजनीति से ऊपर उठकर सबसे पहले राष्ट्र के बारे में विचार करने की जरूरत है। यह बहुत अच्छी बात है कि विवाद के अगले ही दिन बसपा प्रमुख ने वंदे मातरम को अपना समर्थन दे दिया। इससे उनकी पार्टी में सकारात्मक संदेश जाएगा और कार्यकर्ता भी आइंदा राष्ट्रीय मुद्दों पर संयम बरतेंगे। परंतु इस प्रकरण का दूसरा पक्ष भी है। यह चिंता वाजिब है कि पक्ष-विपक्ष में जब पहले ही दिन इतनी कड़वाहट हो गई तो शहर के विकास कार...

"गाय की दुर्दशा"

"गौ माता"   ये वो शब्द हैं जिनमें गाय के लिए सम्मान दिखाई देता है.  परन्तु क्या ये शब्द बोलने से या लिखने से ही हम गाय को सम्मान दे रहे हैं?  गौ रक्षा के लिए तमाम संस्थाएँ काम कर रही हैं। जिनका काम गौ को तस्करों से बचाना है और सुरक्षित गौशालाओं तक पहुँचाना है. जो शायद अपना काम कर भी रही हैं। परन्तु क्या गौ माता  पर केवल तस्करों का ही खतरा है ? 'नहीं' गौ माता को तस्करों से इतना खतरा नहीं है जितना खतरा हमारी कृतघ्ना से है।  जिस दिन हम गौ माता के उपकारों की क़द्र करना शुरू कर देंगे उसी दिन गौ माता की सुरक्षा के लिए न किसी गौ रक्षा दल की जरुरत पड़ेगी और न ही किसी गौशाला की। लेकिन हम इतने कृतघ्न हो गए हैं जब जन्म देने वाली माँ का उपकार नहीं मानते तो गौ माता का उपकार कैसे मान सकते हैं ? जब मशीन नहीं होती थी तो गौ पुत्र ही थे जो हमारे मददगार थे मशीन आते ही हम  भूल गए। और छोड़ दिया आवारा नाम मिला सांड।  अरे यार तुमने भी दूध पिया है उसकी माँ का इस नाते रिश्ता भी बनता है। दूध पिया जब दूध  देना बंद कर दिया तो खाना देना ही बंद कर दिया। फिर भगा दिया द...

मोदी जी, देश के प्रधानमन्त्री के तौर पर ऐसी बातें आपको शोभा नहीं देतीं

गजब चल रहा है साब! आदमी प्रधानमंत्री है. उसे मालूम चलता है कि एक दुश्मन देश का एक ‘नीच आदमी’ आकर विपक्षियों के साथ बैठकर मीटिंग कर रहा है और ये उस बात को रैली में जाकर, दुनिया को ...

किसान का श्रमजल

एक बार भगवान बुद्ध राजगृह में थे। जनसमूह को नित्य प्रवचन देने के उपरांत सायंकाल बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठकर विभिन्न विषयों पर वार्तालाप किया करते थे। ऐसा करने से शिष्यों का भी ज्ञानवर्धन होता था और बुद्ध को उन सभी का तुलनात्मक बौद्धिक स्तर भी ज्ञात हो जाता था। एक दिन बुद्ध अपने शिष्यों के साथ बैठे बातचीत कर रहे थे। अचानक उन्होंने एक प्रश्न उठाया- तुममें से कोई यह बता सकता है कि सबसे उत्तम जल कौन सा है? एक शिष्य ने तत्काल उत्तर दिया-गंगाजल। बुद्ध ने नकारात्मक मुद्रा में सिर हिलाया। दूसरे शिष्य ने कहा- जमीन पर गिरने से पहले का वर्षाजल। बुद्ध इससे भी असहमत थे। तीसरे शिष्य का विचार था उषाकाल की किरणों में चमकता ओसजल।  बुद्ध इस बार भी संतुष्ट नहीं हुए। चौथे शिष्य की दृष्टि में बिछुड़े हुए बेटे से मिलने पर मां की आंखों में आया अश्रुजल सबसे उत्तम जल था तो पांचवें शिष्य के अनुसार फरेब से इकट्ठे धन को देखकर मरणासन्न धनी की आंखों से पश्चाताप स्वरूप निकलने वाले आंसू से बेहतर कोई जल न था। बुद्ध फिर बोले- नहीं, इससे कहीं अधिक वंदनीय व पवित्र जल भी है? काफी देर से मौन बैठे शिष्य आनंद...

गिरती मानसिकता, घटता राष्ट्रप्रेम

मित्रो, पिछले कुछ समय से एक ट्रेंड सा चल निकला है कि कुछ लोग अपने फायदे के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं. जैसे अशहिषुणता, गोकशी, बीफ आदि मुद्दे, जो बहुत चर्चा में रहे और लोगो ने इन्हें भुनाने की पूरी कोशिश की. हम इसे छोड़ देते हैं ये सब भूतकाल की बात सोचकर भुला देते हैं. परन्तु अब जो जवाहर लाल विश्व विद्यालय का प्रकरण है इसने तो अंदर से हिलाकर रख दिया है हर भारतवासी को, सोचने पर मजबूर कर दिया है कि हमारे देश को किस दिशा में ले जाना चाहते हैं हमारे माननीय नेता? हम सबकी सोच अलग हो सकती है परन्तु हम अपनी सीमा का ज्ञान तो रखेंगे ही? हम अपनी माँ को माँ ही कहेंगे? JNU  में जो कुछ किया तथाकथित छात्रों ने वो एक अपराध है ये सब जानते हैं परन्तु हमारे माननीय नेताओं ने जो किया उसे क्या कहें ? इन नेताओं में कोई नया नहीं था, कुछ तो ऐसे थे जो वर्तमान में संवैधानिक पदो पर आसीन हैं और कुछ अपने आपको भविष्य का प्रधानमंत्री दिखाने में लगे हुए हैं. चलो अब एक नजर JNU  प्रकरण पर डालते हैं, वहां पर 9 फ़रवरी को अफजल गुरु की वरसी पर एक कार्यक्रम होता है बिना यूनिवर्सिटी प्रशाशन की अनुमति के और वहां पर ...

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