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छोटी राजनीति, दोगलापन या देशद्रोह

याकूब मेमन को फांसी दे दी गयी जो एक ऐतिहासिक फैसला है, परन्तु इस घटना का जिस तरह से राजनीतिकरण हो रहा है वो बहुत ही दुखद है, हम किसी भी तरह से किसी की मृत्यु को सही नही ठहरा सकते वो भी उसके मरने के बाद, परन्तु याकूब जैसे लोगो के लिए हम उनके जीवित रहने को सही नही कह सकते। जिस तरह से इस मृत्यु दंड के फैसले का मजाक बनाया गया या यूँ कहा जाये हमारे कानून के घुमाव दार पैंतरों इस्तेमाल हमारे प्रबुद्ध वकीलों के द्वारा याकूब को बचाने में किया गया वो हमारे समाज को सोचने पर मजबूर कर देता है, क्या यही हैं हमारे कानून के रखवाले, सताए हुओं को न्याय दिलाने वाले? हम यहाँ मृत्यु दंड को जायज नहीं ठहरा रहे परन्तु जो हमारे महानुभावों ने किया उसका विरोध जरूर कर रहे हैं. इस फैसले का पूरे २२ साल तक इंतज़ार किया हमारे देश की जनता ने क्यों? क्या इसी दिन के लिए  निसंदेह , नही. हमने इंतज़ार किया  क्यूंकि याकूब परिवार और दाऊद की वजह से २५७ निर्दोष लोग मारे गए, बहुत से लोग घायल हुए, किसी ने माँ को खोया और किसी ने बेटे को. किसी परिवार का कमाने वाला चला गया  वो परिवार सड़क पर गया भूखा मरने के लिये… ह...

भूत-प्रेतो💀 को निमंत्रण देता है घर के फ्रिज में रखा हुआ आटा ।

 वर्तमान में बहुत सी गृहिणियां खाना बनाते समय रात को बचा हुआ अतिरिक्त आटा गोल लोई बनाकर उसे फ्रिज में रख देती है और उसका प्रयोग अगले दिन करती है। कई बार सुबह के समय भी आटा बचने पर ऎसा ही किया जाता है। धर्मशास्त्रों के अनुसार गूंथा हुआ आटा पिण्ड माना जाता है जिसे मृतात्मा के भक्षण के लिए अर्पित किया जाता है। जिन भी घरों में लगातार या अक्सर गूंथा हुआ आटा फ्रिज में रखने की परंपरा बन जाती है वहां पर भूत, प्रेत तथा अन्य ऊपरी हवाएं भोजन करने के लिए आने लग जाती है। इनमें अधिकतर वे आत्माएं होती है जिन्हें उनके घरवालों ने भुला दिया या जिनकी अब तक मुक्ति नहीं हो सकी है। ऎसी आत्माओं के घर में आने के साथ ही घर में अनेकों समस्याएं भी आनी शुरू हो जाती हैं। बचे हुए आटे को इस तरह रखने वाले सभी घरों में किसी न किसी प्रकार के अनिष्ट देखने को मिलते हैं। वहां अक्सर बीमारियां, क्रोध, आलस आदि बने रहते हैं और घर में रहने वालों की भी तरक्की नहीं हो पाती है। शास्त्रों के अनुसार ऎसे किसी भी चीज को घर में स्थान नहीं देना चाहिए जो मृतात्माओं का भोजन हो अथवा उन्हें किसी भी प्रकार ...

पत्नी और पति

...पत्नी और पति का ..........यह रिश्ता बड़ा निराला एक को है किसी ने दूजे को किसी ने पाला फिर भी दोनों संग है रहते संग हँसते हैं संग रोते हैं दुनिया में यह दस्तूर है किस ने निकाला ..........पत्नी और पति का ..........यह रिश्ता बड़ा निराला इक दूजे को प्यार है करते कभी कभी तकरार भी करते छोड़ जाने की बात भी करते बच्चों की दुहाई देते पर न निकले पति ही घर से न पत्नी को किसी ने निकाला ..........पत्नी और पति का ..........यह रिश्ता बड़ा निराला रिश्ता है यह सब से ऊपर सब रिश्ते में यह है सुपर पति बिन पत्नी न रहती उसकी न जुदाई सहती पत्नी बिन भी पति न रहता सुख दुःख उस के संग है सहता रिश्ता उस का चले उम्र भर जिसने इसे संभाला ..........पत्नी और पति का ..........यह रिश्ता बड़ा निराला Dedicated to all lovely couple. .

अधिक मास में शुभ योग आज, कर सकते हैं ये उपाय

इन दिनों आषाढ़ का अधिक मास चल रहा है। इसे पुरुषोत्तम मास भी कहते हैं। ग्रंथों के अनुसार यह महीना भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है, इसलिए इस महीने में भगवान विष्णु का पूजन करने का विशेष महत्व है। आज (29 जून, सोमवार) अधिक मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को सोम प्रदोष का शुभ योग बन रहा है।  ये व्रत भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया जाता है। चूंकि अधिक मास तीन साल में एक बार आता है इसलिए भगवान विष्णु के प्रिय महीने में भगवान शिव को प्रसन्न करने वाले व्रत का ये योग बहुत ही खास है। इस दिन यदि कुछ विशेष उपाय किए जाए तो भगवान शिव तो प्रसन्न होंगे ही, साथ ही भगवान पुरुषोत्तम की कृपा भी प्राप्त होगी। शिवपुराण के अनुसार, भगवान शिव को प्रसन्न करने के उपाय इस प्रकार हैं- 1.  भगवान शिव को चावल चढ़ाने से धन की प्राप्ति होती है। 2.  तिल चढ़ाने से पापों का नाश हो जाता है। 3.  जौ अर्पित करने से सुख में वृद्धि होती है। 4.  गेहूं चढ़ाने से संतान वृद्धि होती है। यह सभी अन्न भगवान को अर्पण करने के बाद गरीबों में बांट देना चाहिए। शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन...

रामायण के सुंदरकांड से जुड़ी ये बातें कम ही लोग जानते हैं

हनुमानजी की सफलता के लिए सुंदरकाण्ड को याद किया जाता है। श्रीरामचरित मानस के इस पांचवें अध्याय को लेकर लोग अक्सर चर्चा करते हैं कि इस अध्याय का नाम सुंदरकाण्ड ही क्यों रखा गया है? यहा जानिए इस प्रश्न का उत्तर... श्रीरामचरित मानस में हैं 7 काण्ड श्रीरामचरित मानस में कुल 7 काण्ड (अध्याय) हैं। सुंदरकाण्ड के अतिरिक्त सभी अध्यायों के नाम स्थान या स्थितियों के आधार पर रखे गए हैं। बाललीला का बालकाण्ड, अयोध्या की घटनाओं का अयोध्या काण्ड, जंगल के जीवन का अरण्य काण्ड, किष्किंधा राज्य के कारण किष्किंधा काण्ड, लंका के युद्ध की चर्चा का लंका काण्ड और जीवन से जुड़े प्रश्नों के उत्तर उत्तरकाण्ड में दिए गए हैं। सुंदरकाण्ड का नाम सुंदरकाण्ड क्यों रखा गया? हनुमानजी, सीताजी की खोज में लंका गए थे और लंका त्रिकुटाचल पर्वत पर बसी हुई थी। त्रिकुटाचल पर्वत यानी यहां 3 पर्वत थे। पहला सुबैल पर्वत, जहां के मैदान में युद्ध हुआ था। दूसरा नील पर्वत, जहां राक्षसों के महल बसे हुए थे और तीसरे पर्वत का नाम है सुंदर पर्वत, जहां अशोक वाटिका निर्मित थी। इसी अशोक वाटिका में हनुमानजी और सीताजी की भेंट हुई थी। इ...

मोदी जी शर्म आती है?

भारत में 20 करोड़ भूखे हैं। यूएन की एक रिपोर्ट है। दुनिया में सबसे ज्यादा भूखे हैं हमारे महान देश भारत में। 15 साल पहले सोचा गया था कि इनकी तादाद घटानी है। मकसद तय किया गया था। पूरा नहीं हुआ। चीन, पाकिस्तान और यहां तक कि बांग्लादेश में भी भूखों की तादाद घटी। पर भारत में नहीं। मोदी जी कह सकते हैं कि यह काम यूपीए सरकार को करना चाहिए था। जरूर करना चाहिए था। पर 15 साल पहले जब यह मकसद तय किया गया था तब मोदीजी के आदर्श भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी की ही सरकार थी। उन्हें पता नहीं इस बारे में कुछ करने का वक्त मिला होगा या नहीं। पर सवाल यह नहीं है कि अटल ने क्या किया या मनमोहन ने क्या नहीं किया। ये तो बहाने हैं। सवाल यह है कि मोदी क्या कर रहे हैं। पिछले एक साल में उन्होंने ऐसे क्या कदम उठाए जिनसे भूखों का पेट भरेगा? मोदी की नीतियां क्या किसी सूरत भी कांग्रेस से अलग हैं? क्या उन्होंने ऐसी कोई नीति बनाई है या उसका विचार ही रखा है, जो यूपीए से क्रांतिकारी रूप से अलग हो? जनधन, बीमा, उद्योगों पर निवेश बढ़ाना, जमीनों का अधिग्रहण वगैरह जितने भी बड़े कामों का गाना बीजेपी सरकार गा रही है, वे सब उस...

कई रोगों में रामबाण है ये घरेलू दवा, चरक संहिता में है उल्लेख

कमजोरी के कारण शरीर बीमारियों का शिकार हो जाता है। यदि हम थोड़ी सी सावधानी बरतकर आयुर्वेदिक तरीकों को अपनाएं तो अपने स्वास्थ्य की सही तरह से देखभाल कर पाएंगे। साथ ही, शरीर का कायाकल्प करने में भी आसानी होगी। त्रिफला ऐसी ही आयुर्वेदिक औषधी है जो शरीर का कायाकल्प कर सकती है। त्रिफला का नियमित सेवन करने के बहुत फायदे हैं। स्वस्थ रहने के लिए त्रिफला चूर्ण महत्वपूर्ण है। त्रिफला सिर्फ कब्ज दूर करने ही नहीं बल्कि कमजोर शरीर को एनर्जी देने में भी उपयोग में लाया जा सकता है। इसके अलावा भी इसके बहुत सारे उपयोग है। आयुर्वेदिक डॉक्टरों की यह सबसे पंसदीदा दवा है। इसकी मदद से वे किसी भी रोग के लिए दवाईयां बना सकते है। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि आयुर्वेदिक दवाओं की किताब, चरक सहिंता में सबसे पहले अध्याय में ही त्रिफला के बारे में उल्लेख किया गया है। त्रिफला, आमलकी, हरीतकी और विभतकी का शक्तिशाली मिश्रण है। चलिए आज जानते हैं त्रिफला के बेहद खास उपयोग... 1. कृमि की समस्या को खत्म करता है कृमि की समस्या हो तो त्रिफला खाने से राहत मिलती है। यदि शरीर में रिंगवॉर्म या टेपवॉर्म हो जाते हैं तो भी त्...