Skip to main content

Posts

जो लोग करते हैं ये नौ काम, उनके धन और सुख का होता है नाश

सभी लोग सुख और धन, दोनों एक साथ प्राप्त करना चाहते हैं, लेकिन ये सभी को प्राप्त नहीं हो पाते हैं। कुछ लोग धन अभाव के कारण दुखी रहते हैं तो कुछ अपार संपदा होने के बाद भी सुख प्राप्त नहीं कर पाते हैं। ऐसा जरूरी नहीं है कि जो लोग धनी हैं, वे सुखी भी हों। जबकि कई लोग धन हीन होने के बाद भी सुख का जीवन व्यतीत करते हैं। शास्त्रों में कुछ ऐसे काम बताए गए हैं जो व्यक्ति को सुख और धन, दोनों से दूर करते हैं। यहां जानिए नौ ऐसे काम जो व्यक्ति को दुखी और धन हीन बना सकते हैं... ये काम व्यक्ति के जीवन को भी संकट में डाल सकते हैं... पहला काम-  दिन के समय में स्त्री संग सहवास नहीं करना चाहिए। जो पुरुष इस बात का ध्यान नहीं रखते हैं, वे कई प्रकार की शारीरिक समस्याओं का सामना करते हैं और दुखी रहते हैं। दूसरा काम-  श्रेष्ठ और सुखी जीवन के लिए हमें बुरे स्वभाव वाले लोगों से दूर रहना चाहिए। दुष्ट स्वभाव के लोगों से किसी भी प्रकार का मेल-जोल भी दुख ही देता है। किसी भी दुष्ट स्वभाव वाले व्यक्ति के साथ भोजन भी नहीं करना चाहिए।    तीसरा काम-  हमें कभी भी किसी विद्वान, ब्राह्मण य...

इंडियन मैरिड कपल्स के लिए ज़रूरी है ये 8 सीक्रेट्स

शादी के बाद लड़के और लड़कियों की लाइफ बदल जाती है। शादी लाइफ को वो पड़ाव है, जहां से जिंदगी का असली सफर शुरू होता है। शादी से पहले आप अपने हिसाब से जीते हैं, अपनी एक अलग दुनिया में ही रहते हैं, लेकिन शादी के बाद आपको अपने पार्टनर के हिसाब से रहना होता है। शादी के बाद कपल की लाइफ में कुछ ऐसे बदलाव आते हैं, जिनके बारे में आपको पता होना चाहिए। इंडियन कल्चर शादी के मामले में थोड़ा-सा अलग है। यहां आपको 10 चीज़ें सोच कर करनी होती है। शादी के बाद आप बहू बनती हैं और उसी तरह से सास या फैमिली के बाकी लोगों के साथ आपका व्यवहार बदल जाता है। इस व्यवहार में क्या बदलाव होते हैं, हम आपको बताने जा रहे हैं। तो ‘कपल्स गेट रेडी फॉर शादी का पंचनामा'। 1- बहू की इन-लॉज के साथ तुलना करना   शादी होते ही आपके ब्वॉयफ्रेंड की उम्मीदें बढ़ने लगती हैं। ऐसे में, सबसे पहले जो उम्मीद सामने आती है, वो है उसकी मां की तरह गुणी और केयरिंग होना। इसलिए आपके अंदर भी खाना बनाना, फैमिली का ध्यान रखना और घर को संभालने के गुण होने चाहिए। शादी के बाद बहू और सास की तुलना होना लाजिमी है। इसलिए इसके लिए तैयार रहें। ...

विभागों में निकली हैं सरकारी नौकरियां

 विभागों में निकली हैं सरकारी नौकरियां  ये सरकारी नौकरियां रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, असम पुलिस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, अकाउंटेंट जनरल (ऑडिट), पटना; सर्वे ऑफ इंडिया, नेशनल हाईड्रॉलिक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड, फरीदाबाद और सर्व यूपी ग्रामीण बैंक, मेरठ में निकली हैं।   यह भी पढ़ें : यूपी में 15 हजार प्राइमरी टीचर्स की पोस्ट के लिए निकली है वैकेंसी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया पद :  38 पद का नाम :  जूनियर इंजीनियर (सिविल - 23 पद, इलेक्ट्रीकल - 15 पद) योग्यता : जूनियर इंजीनियर सिविल -  किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से सिविल / इलेिक्ट्रकल इंजीनियरिंंग में न्यूनतम 65 प्रतिशत अंकों के साथ 3 वर्ष का डिप्लाेमा और 2 वर्ष का अनुभव या न्यूनतम 55 प्रतिशत अंकों के साथ डिग्री और एक वर्ष का अनुभव होना आवश्यक।  जूनियर इंजीनियर इलेिक्ट्रकल-  किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से इलेिक्ट्रकल/ इलेिक्ट्रकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंंग मंे न्यूनतम 65 प्रतिशत अंकों के साथ 3 वर्ष का डिप्लाेमा और 2 वर्ष का अनुभव या न्यूनतम...

कार्य और बेगार

एक बूढ़ा कारपेंटर अपने काम के लिए काफी जाना जाता था , उसके बनाये लकड़ी के घर दूर -दूर तक प्रसिद्द थे . पर अब बूढा हो जाने के कारण उसने सोचा कि बा की की ज़िन्दगी आराम से गुजारी जाए और वह अगले दिन सुबह-सुबह अपने मालिक के पास पहुंचा और बोला , ” ठेकेदार साहब , मैंने बरसों आपकी सेवा की है पर अब मैं बाकी का समय आराम से पूजा-पाठ में बिताना चाहता हूँ , कृपया मुझे काम छोड़ने की अनुमति दें . “ ठेकेदार कारपेंटर को बहुत मानता था , इसलिए उसे ये सुनकर थोडा दुःख हुआ पर वो कारपेंटर को निराश नहीं करना चाहता था , उसने कहा , ” आप यहाँ के सबसे अनुभवी व्यक्ति हैं , आपकी कमी यहाँ कोई नहीं पूरी कर पायेगा लेकिन मैं आपसे निवेदन करता हूँ कि जाने से पहले एक आखिरी काम करते जाइये .” “जी , क्या काम करना है ?” , कारपेंटर ने पूछा . “मैं चाहता हूँ कि आप जाते -जाते हमारे लिए एक और लकड़ी का घर तैयार कर दीजिये .” , ठेकेदार घर बनाने के लिए ज़रूरी पैसे देते हुए बोला . कारपेंटर इस काम के लिए तैयार हो गया . उसने अगले दिन से ही घर बनाना शुरू कर दिया , पर ये जान कर कि ये उसका आखिरी काम है और इसके बाद उसे और कुछ नहीं करना होगा...

गांधी मात्र एक राजनैतिक मजबूरी का नाम

आज के संदर्भ में गांधी मात्र एक राजनैतिक मजबूरी का नाम है। आज स्थिति यह है कि भगवान को नकारा जा सकता है लेकिन गांधी को नहीं। मान लें कि pk फिल्म में शिव के स्थान पर कलाकार गांधी के रूप में होता और नायक के मन में यह बात होती कि गांधी ने आजादी दिलाई और मेरा रिमोट भी यही दिलाएंगे (सत्याग्रह से) तो कैसा दृश्य होता। फिल्म बोर्ड तक पास नहीं करता वह दृश्य। सारे काग्रेसी गांधी और गोडसे को लेकर अति असहिष्णु हैं। इस त्थ्य पर कोई चर्चा नहीं करना चाहता कि गांधी के उभरने से अंग्रेजों को ह िन्दु-मुसलमान के बीच की खाई को चौड़ा करने वाला एक औजार मिल गया और तुष्टीकरण की नीति की नींव पड़ी। वास्तव में संघ की असली देन यह है कि इसने सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की भावना को संवैधानिक ढांचे भीतर पोषित किया और मरने नहीं दिया। दिशाहीन अतिवादी हिन्दु जो भी संघ से जुड़े (उन्हें संघ ही सबसे करीब वैचारिक संगठन लगा) उनकी अतिवादी धार को संघ ने कुंद कर दिया जिससे वे लोकतांत्रिक रास्ते पर चल कर अपने ध्येय को पहचान पाए (सेकुलर उकसाहटों के बावजूद)। जहां तक मानवीय मूल्यों का प्रश्न है, गांधी से कोई मतभेद का सवाल नहीं, वे गांधी...

दाऊद इब्राहीम तस्कर है या आतंकवादी ?

दाऊद इब्राहीम तस्कर है या आतंकवादी ? दो दिन पहले कोस्ट गार्ड के कमांडो ने समंदर में तस्कर मारे थे या आतंकवादी ? इस घटना को किस चश्मे से देखें ? धर्म निरपेक्षता के चश्मे से या साम्प्रदायिकता के चश्मे से ? इस पर अमित शाह की बात माने या अजय माकन की ? इस मसले पर इंडियन एक्सप्रेस की खबर पढ़े या इंडिया टीवी को सुने ? .............................................................................................. ये हाल है उस देश का जहाँ इतिहास के दो सबसे बड़े आतंकी हमले समंदर के रास्ते से किये गये हैं. 1993 के मुंबई सीरियल धमाकों में गोला बारूद कराची से समंदर के रास्ते नाव पर लाया गया था. इन धमाकों में हमारे देश के 350 लोग मारे गये और 1200 घायल हुए. 2008 में फिर मुंबई में आतंकी हमला हुआ जिसमे 164 लोग मारे गये और 308 घायल हुए.इस हमले में भी गोला बारूद कराची से समंदर के रास्ते आया था. आतंक के इसी रास्ते पर कोस्ट गार्ड को दो दिन पहले एक संदिग्ध नाव दिखी थी जिसके इंटरसेप्ट ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पकडे थे. क्या उस नाव को रोकना चाहिय था ? सच ये है कि मुंबई धमाकों के 21 साल बाद ...पहली बार देश की तटीय...

लकड़ी का कटोरा

एक वृद्ध व्यक्ति अपने बहु – बेटे के यहाँ शहर रहने गया . उम्र के इस पड़ाव पर वह अत्यंत कमजोर हो चुका था , उसके हाथ कांपते थे और दिखाई भी कम देता था . वो एक छोटे से घर में रहते थे , पूरा परिवार और उसका चार वर्षीया पोता एक साथ डिनर टेबल पर खाना खाते थे . लेकिन वृद्ध होने के कारण उस व्यक्ति को खाने में बड़ी दिक्कत होती थी . कभी मटर के दाने उसकी चम्मच से निकल कर फर्श पे बिखर जाते तो कभी हाँथ से  दूध छलक कर मेजपोश पर गिर जाता . बहु -बेटे एक -दो दिन ये सब सहन करते रहे पर अब उन्हें अपने पिता की इस काम से चिढ होने लगी . “ हमें इनका कुछ करना पड़ेगा ”, लड़के ने कहा . बहु ने भी हाँ में हाँ मिलाई और बोली ,” आखिर कब तक हम इनकी वजह से अपने खाने का मजा किरकिरा रहेंगे , और हम इस तरह चीजों का नुक्सान होते हुए भी नहीं देख सकते .” अगले दिन जब खाने का वक़्त हुआ तो बेटे ने एक पुरानी मेज को कमरे के कोने में लगा दिया , अब बूढ़े पिता को वहीँ अकेले बैठ कर अपना भोजन करना था . यहाँ तक की उनके खाने के बर्तनों की जगह एक लकड़ी का कटोरा दे दिया गया था , ताकि अब और बर्तन ना टूट -फूट सकें . बाकी लोग पहले की ...