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रिनझाई,

रिनझाई, कोरिया देश के माने हुये सन्त थे। उनके निकट रहकर अनेकों ने सिद्धियाँ पाई थीं। एक धनी व्यक्ति आया और कहा- मुझे बहुत व्यस्तता है, जल्दी सिद्धियाँ मिले, ऐसा उपाय बता दीजिए। रिनझाई ने कहा- बस मात्र तीस वर्ष लगेगा। इतने समय ठहरना पड़ेगा आश्चर्यचकित होकर उसने पूछा भला इतना समय किसलिए? उत्तर मिला- गलती हो गयी- तुम्हें साठ वर्ष ठहरना पड़ेगा। उतावली दूर करने के तीस वर्ष और सन्देह हटाने के लिए तीस वर्ष। उस बार व्यक्ति वापस लौट गया। पर घर जाकर विचार करने लगा। इतने बड़े लाभ के लिए  यदि सारी जिन्दगी भी लग जाय तो क्या हर्ज है। वह वापस लौट आया और साठ वर्ष साधना करने के लिए तैयार हो गया। तीन वर्ष पूरे हो पाये थे कि साधना पूरी हुई और सिद्धि मिल गयी। इतनी देर में होने वाला काम इतनी जल्दी कैसे हो गया, इस शंका का समाधान करते हुये रिनझाई ने कहा- उतावली और असमंजस यह दो ही साधना मार्ग के दो बड़े विघ्न हैं, यदि धैर्य और विश्वास जम सके तो आत्मिक प्रगति में देर नहीं लगती।

मार्मिक कहानी कहानी एक गलती की :-

एक बार कुछ विद्यार्थी रसायन विज्ञानं प्रयोगशाला में कुछ प्रयोग कर रहे थे. सभी विद्यार्थी अपने अपने प्रयोगों में व्यस्त थे कि अचानक एक लड़के की परखनली से तेज बुलबुला उठा और उसकी छिट्कियाँ सामने प्रयोग कर रही लड़की की आँखों में चला गया. पूरी प्रयोगशाला में हाहाकार मच गया, सभी खूब परेशांन हुए, आनन फानन में उस लड़की को अस्पताल पहुँचाया गया, वहाँ डाक्टरों ने बताया कि वो अपनी आँखें खो चुकी है. ये सुन कर उस लड़की के घर वालों ने उस लड़के को कोसना शुर ू कर दिया और स्कूल वालों ने उस लड़के को स्कूल से निकाल दिया. अब वो अंधी लड़की अपनी नीरस ज़िन्दगी बिता रही थी, जो शायद किसी की लापरवाही की वजह से वीरान सी हो गयी थी, अब उस लड़की की ज़िन्दगी में कोई भी रंग कोई मायने नहीं रखता था. घर वाले भी वक़्त बेवक्त उस लड़के को कोसते रहते थे जिसने उनकी लड़की की ज़िन्दगी खराब कर दी थी. आज कल के ज़माने में तो किसी के सामने हूर परी भी बैठा दो तो भी लड़के वालों को उससे भी ज्यादा खूबसूरत चाहिए होती है. फिर उस बिचारी की वीरान ज़िन्दगी में रंग भरने की बात सोच पाना भी असंभव सा था. खैर वक़्त बीतता गया और उस लड़की को उस ...

हमारा देश फिर से सोने की चिड़िया बनकर चहचहा सके

मैं गाय की पूजा करता हूँ | यदि समस्त संसार इसकी पूजा का विरोध करे तो भी मैं गाय को पुजूंगा-गाय जन्म देने वाली माँ से भी बड़ी है | हमारा मानना है की वह लाखों व्यक्तियों की माँ है “ - महात्मा गाँधी  गौ मे ३३ करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है , अतः गौ हमारे लिए पूजनीय है परन्तु क्या इन धार्मिक मान्यता के आधार पर भी आज ही़नदुस्तान में गौ को उसका समुचित स्थान मिल पाया है ? नहीं |  अतः समय है आज के (तथाकथित ) वैज्ञानिक एवं व्याप ारिक युग में गौ की उपयोगिता के उस पहलु पर भी विचार किया जाये तब शायद उसके ये मानस-पुत्र स्वर्थावास ही सही परन्तु उसकी हत्या करने के पाप से बच तो जायेंगे | संपूर्ण जीवधारियो में गौ का एक अलग और महत्वपूर्ण स्थान है | यह स्थान ज्ञान और विज्ञान सम्मत है , ज्ञान और विज्ञान के पश्चात आध्यात्म तो उपस्थित हो ही जाता है | इस प्रकार ज्ञान , विज्ञान और आध्यात्म – इन तीन की बराबर रेखाओ के सम्मिलन से जो त्रिभुज बनता है ,उसे गाय कहते है | विद्वानों ने गाय को साक्षात् पृथ्वी-स्वरूपा बतलाया है| इस जगत के भार को जो समेटे हुए है और जगत के संपूर्ण गुणों की जो खान है उसका नाम ...
महाभारत हो गया था एक नारी के अपमान पर, तो रामजी बनवास चले गये थे अपने पिता के सम्मान पर कैसे विचार पल रहे है आज की पीढी में गन्दे विचार और आग रहती है जुबान पर कोई क्यों आज बेटी का सम्मान नही करता बेटी होने पर क्यों कोई अभिमान नही करता नारी का हर रुप सम्मान का हकदार है। फिर इसका असर क्यों नही होता इन्सान पर अभी वक्त है बचा लो इस धरती को, बेटी,बहन, पत्नी और माँ की संस्कृति को जमीं नही बची तो कुलदीपक कहाँ मिलेगा अच्छी सोच सोचो, गर्व करो बेटी के स्वाभिमान पर....

अगर शोले संस्कृत में होती तो..

१.......बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना || हे बसन्ति एतेषां श्वानानाम् पुरत: मा नृत्य|| २.......अरे ओ सांबा, कितना इनाम रखे हैं सरकार हम पर? ||हे साम्बा, सर्वकारेण कति पारितोषिकानि अस्माकं कृते उद्घोषितानि? ३.......चल धन्नो आज तेरी बसंती की इज्जत का सवाल है ||धन्नो, (चलतु वा) धावतु अद्य तव बसन्त्य: लज्जाया: प्रश्न: अस्ति | ४.......जो डर गया समझो मर गया || य भीत:भवेत् स:मृत:एव मन्य || ५.......आधे इधर जाओ, आधे उधर जाओ और बाकी हमारे पीछे आओ || केचन पुरुषा:अत्र गच्छन्तु केचन पुरुषा: तत्र गच्छन्तु शेषा:पुरुषा:मया सह आगच्छतु|| ६......सरदार, मैने आपका नमक खाया है ||हे प्रधानपुरुष: मया तव लवणम् खाद्यते || ७.......अब गोली खा. ||अधुना गोलीम् खाद || ८.......सुअर के बच्चो... ||हे सुकराणां अपत्यानि.....|| ९.......तेरा क्या होगा कालिया...| हे कालिया तव किं भवेत् ? १०......ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर ॥ ठाकुर, यच्छतु मह्यं तव करौ || ११......हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर है| ||अहं आंग्लपुरुषाणाम् समयस्य कारानिरीक्षक: अस्ति || १२..... तुम्हारा नाम क्या है बसंती? ||बसन्ति किं तव नामधेयम् ? १३......होली क...

शाम को नहीं करना चाहिए ये 7 काम, इन्हें माना जाता है गरीबी बढ़ाने वाला

  हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने के लिए समय को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। फिर वो समय चाहे शादी का हो पूजन हो या अन्य किसी काम का। शास्त्रों में बताया गया है कि हर काम को यदि उचित समय पर किया जाए तो उसके बेहतर परिणाम मिलते हैं। यदि अपने जीवन को हमेशा खुशहाल और समृद्धि से परिपूर्ण रखना चाहते हैं तो यहां बताए जा रहे हैं कुछ कामों को शाम के समय कभी न करें। शाम को जब मंदिर में व अन्य धार्मिक स्थल पर भगवान की आराधना की जाती है। उस समय कुछ कार्यो को करना अशुभ माना जाता है। कहा जाता है कि इन कामों को शाम के समय करने से घर में हमेशा दरिद्रता रहती है। आमदनी अधिक होने पर भी पैसा नहीं टिकता है। आइए जानते हैं कौन से है वो काम जिन्हें सूर्यास्त के समय करना निषेध माना गया है। 1. सोना नही चाहिए-   सूर्यास्त के समय किसी को भी लेटना या सोना नहीं चाहिए। इस समय को भगवान की आराधना और आरती आदि के लिए श्रेष्ठ माना गया है। शास्त्र कहते हैं यदि आप बीमार नहीं है या कोई अन्य आवश्यक कारण नहीं है तो सूर्यास्त के समय नहीं सोना चाहिए। इस समय सोने से लक्ष्मी नाराज होती हैं और व्यक्ति बीमार और स...
ना स्वर है ना सरगम है, ना लय ना तराना है हनुमान के चरणों में, एक फूल चढ़ाना है ।। टेर।। तुम बाल रूप में प्रभु, सूरज को निगल डाले अभिमानी सुरपति के, सब दर्प मसल डाले बजरंग हुए तब से, संसार ये जाना है ।। हनुमान ।। सब दुर्ग ढहा करके, लंका को जलाये तुम सीता की खबर लाये, लक्ष्मण को बचाये तुम प्रिय भरत सरिस तुम को, श्रीराम ने माना है ।। हनुमान ।। जब राम नाम तुम ने, पाया ना नगीने में तुम फाड़ दिये सीना, सीया राम थे सीने में विस्मित जग ने देखा, कपि राम दीवाना है ।। हनुमान ।। हे अजर अमर स्वामी, तुम हो अन्तर्यामी ये दीन हीन चंचल अभिमानी अज्ञानी तुम ने जो नजर फेरी, फिर कौन ठिकाना है ।। हनुमान ।।