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कब होती है सच्चे हितैषी की पहचान

अपने-पराए लोगों की परख करने के लिए आचार्य चाणक्य ने कहते हैं-   आतुरे व्यसने प्राप्ते दुर्भिक्षेत्र शत्रुसंकटे। राजद्वारे श्मशाने च यस्तिष्ठति स बांधव:।।   आचार्य ने इस श्लोक में व्यक्ति की परख के लिए अलग-अलग स्थितियां बताई हैं, ये स्थितियां इस प्रकार हैं... - जब कोई व्यक्ति किसी भयंकर बीमारी से पीडि़त हो और उस समय जो लोग साथ देते हैं, वे ही सच्चे हितैषी होते हैं। - जब किसी व्यक्ति के जीवन में कोई भयंकर दुख आ जाए या किसी मुकादमे, कोर्ट केस में फंस जाए, उस समय जो इंसान गवाह के रूप में साथ देता है वही मित्र कहलाने का अधिकारी होता है। किसी व्यक्ति की मृत्यु के समय पर जो लोग उपस्थित होते हैं वे सच्चे हितेषी होते हैं।

हमें कैसे स्थान पर रहना चाहिए

हमें कैसे स्थान पर अपना निवास या घर बनाना चाहिए, इस संबंध में आचार्य चाणक्य ने 5 बातें बताई हैं। जिस स्थान पर ये बातें उपलब्ध हों, वहां रहना सर्वश्रेष्ठ है और ऐसे स्थान पर रहने वाला व्यक्ति हमेशा प्रसन्न रहता है, हमेशा फायदे में रहता है... आचार्य चाणक्य कहते हैं-   धनिक: श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचम:। पंच यत्र न विद्यन्ते तत्र दिवसं वसेत्।।   इसका श्लोक में आचार्य चाणक्य ने निवास स्थान के लिए पांच बात बताई हैं, वे इस प्रकार हैं...   पहली बात-  जिस स्थान पर कोई धनी व्यक्ति होता है, वहां व्यवसाय में बढ़ोतरी होती है। धनी व्यक्ति के आसपास रहने वाले लोगों के लिए अच्छा रोजगार प्राप्त होने की संभावनाएं अधिक रहती हैं।   दूसरी बात-  जिस स्थान पर कोई ज्ञानी हो, वेद जानने वाला व्यक्ति हो, वहां रहने से धर्म लाभ प्राप्त होता है। हमारा ध्यान पापकर्म की ओर बढऩे से बचता है।   तीसरी बात-  जहां राजा या शासकीय व्यवस्था से संबंधित व्यक्ति रहता है, वहां रहने से हमें शासन की सभी योजनाओं का लाभ प्राप्त होता है।   चौथी बात-  जिस स्थान पर पवित्र ...

आचार्य चाणक्य

भारत के इतिहास में आचार्य चाणक्य का महत्वपूर्ण स्थान है। एक समय जब भारत छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शासक सिकंदर भारत पर आक्रमण करने के लिए भारतीय सीमा तक आ पहुंचा था, तब चाणक्य ने अपनी नीतियों से भारत की रक्षा की थी। चाणक्य ने अपने प्रयासों और अपनी नीतियों के बल पर एक सामान्य बालक चंद्रगुप्त को भारत का सम्राट बनाया जो आगे चलकर चंद्रगुप्त मौर्य के नाम से प्रसिद्ध हुए और अखंड भारत का निर्माण किया। चाणक्य के काल में पाटलीपुत्र (वर्तमान में पटना) बहुत शक्तिशाली राज्य मगध की राजधानी था। उस समय नंदवंश का साम्राज्य था और राजा था धनानंद। कुछ लोग इस राजा का नाम महानंद भी बताते हैं। एक बार महानंद ने भरी सभा में चाणक्य का अपमान किया था और इसी अपमान का प्रतिशोध लेने के लिए आचार्य ने चंद्रगुप्त को युद्धकला में पारंपत किया। चंद्रगुप्त की मदद से चाणक्य ने मगध पर आक्रमण किया और महानंद को पराजित किया। आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी हमारे लिए बहुत उपयोगी हैं। जो भी व्यक्ति नीतियों का पालन करता है, उसे जीवन में सभी सुख-सुविधाएं और कार्यों में सफलता प्राप्त होती है

चाणक्य नीति: ऐसे समय में पिएंगे पानी तो पानी हो जाता है विष समान

पानी से शरीर को जीने के लिए ऊर्जा मिलती है और इसकी सही मात्रा से हमारे पाचन तंत्र को भी काम करने में सहायता मिलती है। पानी पीना स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद है, लेकिन कुछ परिस्थितियों में पानी से स्वास्थ्य को नुकसान भी हो सकता है। खाना खाने से ठीक पहले पानी पीने से पाचन शक्ति कमजोर होती है। आचार्य चाणक्य ने एक नीति में बताया है कि गलत समय पर पानी पीना स्वास्थ्य के लिए कैसे हानिकारक हो सकता है। इस नीति में कुछ परिस्थितियां बताई हैं जब पानी पीने से नुकसान हो सकता है। आचार्य चाणक्य कहते हैं कि... अजीर्णे भेषजं वारि जीर्णे वारि बलप्रदम्। भोजने चाऽमृतं वारि भोजनान्ते विषप्रदम्।। इस श्लोक में आचार्य ने बताया है कि भोजन के एकदम बाद पानी नहीं पीना चाहिए। खाना खाने के बाद जब तक खाना पच ना जाए, तब तक पानी पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक होता है। यदि कोई व्यक्ति भोजन के तुरंत बाद ज्यादा पानी पी लेता है तो उसके पाचन तंत्र को भोजन पचाने में परेशानियां होती हैं। यदि खाना ठीक से पचेगा नहीं तो शरीर को उचित ऊर्जा प्राप्त नहीं हो सकेगी। अपच की स्थिति में पेट संबंधी रोग होने की संभावनाएं बढ़ जात...

उदास क्यों हो?

संता और बंता कई दिनों बाद मिले संता कुछ उदास सा लग रहा था और आँखों में आंसू थे। बंता ने पूछा, "अरे तुम तो ऐसे लग रहे हो जैसे तुम्हारा सुब कुछ लुट गया हो क्या बात है?" संता ने कहा, "अरे क्या बताऊँ तीन हफ्ते पहले मेरे अंकल गुजर गए और मेरे लिए 50 लाख रूपए छोड़ गए।" बंता: तो इसमें बुरी बात क्या है? संता ने कहा: और सुनो दो हफ्ते पहले मेरा एक चचेरा भाई मर गया जिसे मैं जानता भी नहीं था वो मेरे लिए 20 लाख रूपए छोड़ गया। बंता ने कहा: ये तो अच्छा हुआ। बंता ने कहा: पिछले हफ्ते मेरे दादाजी नहीं रहे और वो मेरे लिए पूरा 1 करोड़ छोड़ गए। बंता ने कहा: ये तो और भी अच्छी बात है पर तुम इतना उदास क्यों हो? संता ने कहा: इस हफ्ते कोई भी नहीं मरा। 

हैप्पी एंडिंगः समीक्षा पढ़कर ही देखिए फिल्म

एक खूबसूरत सपना है। एक लेखक का उपन्यास इतना हिट हुआ कि उसने साढ़े पांच साल सिर्फ रॉयल्टी के दम पर जिंदगी के मजे लूटे। शानदार घर, लक्जरी कार, क्लब में पार्टियां, शराब और समय-समय पर बदलती गर्लफ्रेंड। हिंदुस्तान में यह सपना क्या कभी सच हो सकता है? दुनिया के किसी कोने में किसी भाषा के एकाध लेखक के साथ ऐसा कभी घट जाए तो उसकी कहानी कितनी नीरस और जड़ हो सकती है, वह आप हैप्पी एंडिंग में देख सकते हैं। एक है यूडी (सैफ अली खान)। अमेरिका में रहता है। वही इस सपने वाला लेखक है। सारा पैसा उड़ा कर वह कंगाली के कगार पर है और तुरंत पैसा कमाना है। उसका एजेंट उसे एक बॉलीवुड स्टार (गोविंदा) से मिलवाता है, जो रोमांटिक कॉमेडी लिखाना चाहता है। लेखन की दुनिया में यूडी की जगह दूसरी राइटर आंचल (इलियाना डिक्रूज) ले चुकी है।  रोमांटिक कॉमेडी लिखते-लिखते यूडी और आंचल में प्यार होता है। लेकिन दोनों एक-दूसरे के साथ जिंदगी बिताने का वादा नहीं करते। बस, यह फैसला करते हैं कि एक-एक दिन साथ जीएंगे। ये है हैप्पी एंडिंग। ट्विस्ट देने के लिए इसमें यूडी की एक गर्लफ्रेंड (कल्कि कोचिलीन) है, जिसे वह छोड़ना चाहता है और वह प...

संत की नसीहत

बहुत समय पहिले की बात है बाबा भारती नाम के एक संत किसी गाँव मे रहते थे । वे गाँव के सभी लोगों से बड़ा प्रेम रखते थे एवं उनकी हमेशा सहायता करने मे तत्पर रहते थे । गाँव वासी भी उन्हे बहुत चाहते थे । बाबा भारती के पास एक घोडा था जिसे उन्होने जब वह बच्चा था तब से पाला था । बड़ा होने पर वह घोडा बहुत फुरतीला एवं अच्छी कद काठी वाला हो गया । बाबा भारती को उससे अत्यधिक लगाव था और वो एक पल के लिए भी उसे नहीं छोडते थे । घोड़े और उससे बाबा भारती के लगाव की कथा शीघ्र ही दूर द ूर तक फेल गयी और लोग इसे प्रत्यक्ष देखने के लिए आते रहते थे । उनमे से कुछ लोग बाबा से घोड़े को बेचने का प्रस्ताव भी रख देते थे । परंतु बाबा को यह नामंज़ूर था । वो साफ मना कर देते थे । धीरे धीरे ये बात प्रख्यात डाकू खड़ग सिंह को पता लगी । वह भी घोडा देखने बाबा की कुटिया पे पहुँच गया । घोडा अत्यधिक पसंद आने पे उसने बाबा को अपना असली परिचय देते हुए उसे खरीदने की पेशकश बाबा के सन्मुख की , परंतु बाबा किसी भी तरह तैयार नहीं हुए । खड़ग सिंह को ये बात अच्छी नहीं लगी और उसने बाबा को कहा बाबा जी आपको घोड़े का क्या काम एवं अब यह घोडा आप...